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May 23, 2025
हिमाचल संजौली मस्जिद मामला: सेशन कोर्ट से वक्फ बोर्ड को नहीं मिली राहत, MC को भेजे समन
एमसी कोर्ट के फैसले को वक्फ बोर्ड ने सेशन कोर्ट में दी है चुनौती
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित विवादित संजौली मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है। सेशन कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान मस्जिद से जुड़ी याचिका पर प्रारंभिक बहस हुई, जिसके बाद अदालत ने मामले को 26 मई तक के लिए स्थगित कर दिया है। कोर्ट ने मस्जिद कमेटी और शिमला नगर निगम को समन जारी करने के निर्देश दिए हैं।
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इस प्रकरण में वक्फ बोर्ड ने शिमला नगर निगम आयुक्त के पूरी मस्जिद के अवैध घोषित करने और उसे गिराने के आदेशों को सेशन कोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन अदालत ने वक्फ बोर्ड को फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम राहत नहीं दी है।
संजौली क्षेत्र में बनी यह मस्जिद काफी समय से विवादों के घेरे में रही है। नगर निगम के अनुसार, इस भवन का निर्माण बिना वैध अनुमति और स्वीकृत नक्शे के किया गया था। निगम ने दावा किया है कि मस्जिद की ऊपरी तीन मंजिलों को पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका है, और अब हालिया आदेश में निचली दो मंजिलों को भी गिराने का निर्देश दिया गया है।
नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने स्पष्ट किया है कि वक्फ बोर्ड को कई अवसर दिए गए थे, ताकि वे जमीन के मालिकाना हक और नक्शे से संबंधित दस्तावेज आयुक्त कोर्ट में प्रस्तुत कर सकें, लेकिन बोर्ड बार.बार इस संबंध में असफल रहा। जिसके चलते एमसी आयुक्त कोर्ट ने संजौली मस्जिद की पहले ऊपर की तीन मंजिलों और बाद में नीचे की दो मंजिलों को गिराने के आदेश जारी किए।
यह विवाद नया नहीं है। वर्ष 2008 से ही यह मामला नगर निगम की अदालत में विचाराधीन था, जहां अब तक 50 से अधिक बार सुनवाई हो चुकी है। अंततः हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में तेजी लाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद 3 मई 2024 को निगम की ओर से निर्णय सुनाया गया। वक्फ बोर्ड ने निगम के आदेश को अनुचित बताते हुए इसे सेशन कोर्ट में चुनौती दी है। फिलहाल सभी पक्षों को समन भेजे जा चुके हैं और 26 मई को अगली सुनवाई तय की गई है।
यह मामला तब और तूल पकड़ गया जब अगस्त 2024 में शिमला के मेहली क्षेत्र में दो समुदायों के बीच विवाद हुआ। इस हिंसा के बाद एक पक्ष के लोग संजौली मस्जिद में शरण ले गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया। स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। हालांकि, 12 सितंबर को मस्जिद कमेटी ने नगर निगम के समक्ष खुद अवैध हिस्से को तोड़ने की पेशकश की, जिससे कुछ हद तक मामला शांत हुआ।
स्थानीय निवासियों और कुछ हिंदू संगठनों का आरोप है कि मस्जिद न सिर्फ बिना अनुमति के बनाई गई है, बल्कि जिस जमीन पर इसका निर्माण हुआ है, वह वक्फ बोर्ड की स्वामित्व वाली भूमि भी नहीं है। संगठनों का कहना है कि बिना वैध दस्तावेजों और नक्शे के मस्जिद का निर्माण नगर नियोजन अधिनियम का उल्लंघन है।
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अब सभी की निगाहें 26 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां कोर्ट यह तय कर सकता है कि वक्फ बोर्ड की याचिका में दम है या नहीं। यह फैसला न केवल इस मस्जिद के भविष्य को तय करेगा, बल्कि प्रदेश में ऐसे अन्य मामलों की दिशा भी निर्धारित कर सकता है।