सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में महोग नाम का एक गांव है। पुराने समय में यहां के किसान परिवार पारंपरिक अनाज की खेती किया करते थे। इससे उन्हें सीमित आमदनी होती थी लेकिन जब उन्हें फूलों की खेती के बारे में पता चला तो सबने यही करने की ठान ली। फिर क्या था फूलों का बढ़िया उत्पादन होने लगा और सालाना कमाई लाखों में पहुंच गई।
महोग गांव में करोड़ों की कमाई
किसी एक किसान की सालाना कमाई लाखों में और सभी किसानों को मिलाकर सालाना आय करोड़ों में। इतना ही नहीं, इस कारोबार की वजह से हिमाचल के युवाओं के पलायन पर भी रोक लगी है। अब युवा गांवों में रहकर ही फूलों की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं।
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महल के माली ने दी थी सलाह
दरअसल महोग गांव से एक व्यक्ति महाराजा पटियाला के महल में माली का काम करता था। उसने ही गांव के किसान आत्म स्वरूप को फूलों की खेती करने के लिए कहा। आत्म स्वरूप ने इस सलाह को मानते हुए 1990 में फूलों की खेती शुरू कर दी।
फूल उगाने में जुट गए स्वरूप
आत्म स्वरूप ने माली से ही ग्लैडियस फूल की कलमें लीं और इन्हें अपने खेत में लगाया जिसकी पैदावार बहुत अच्छी हुई। इसी के बाद आत्म स्वरूप ने ठान ली कि वे फूलों की खेती ही करेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने परिवार को भी सब्जी के बजाय फूल उगाने के लिए तैयार कर लिया।
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रास्ते में ही खराब होने लगे फूल
आत्म स्वरूप बताते हैं कि उन्होंने फूलों की खेती तो शुरू कर दी, उत्पादन भी सही हो रहा था लेकिन उनके सामने आई- फूलों को बेचने की समस्या। पहले सड़क, फिर बस और फिर ट्रेन। इस लंबे सफर में माल रास्ते में ही खराब हो जाता।
दिल्ली जाती है फूलों की गाड़ी
स्वरूप जी ने धीरे-धीरे गांव के दूसरे लोगों को भी फूलों की खेती करने के लिए राजी किया। ऐसे में दूसरे लोग भी फूलों की खेती करने लगे और उत्पादन बढ़ गया तो गांव से गाड़ी के माध्यम से फूल सीधा दिल्ली पहुंचाया जाने लगा। ये प्रक्रिया हर तीसरे दिन दोहराई जाने लगी।
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हॉलैंड के वैज्ञानिक ने दी सलाह
आत्म स्वरूप बताते हैं कि पहले वे खुले में फूलों की खेती करते थे लेकिन एक बार हॉलैंड के वैज्ञानिक उनके यहां आए। उन्होंने उन्हें बताया कि फूलों की खेती को खुले में ना करके प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन यानी पॉलीहाउस में करना चाहिए।
पॉलीहाउस में बेहतर हुई क्वॉलिटी
इस सलाह पर उन्होंने पॉलीहाउस तैयार कर फूलों की खेती की जिससे क्वॉलिटी बेहतर हुई और बीमारियां भी कम हुईं। आज गांव में कारनेशन, लिलीयम, ब्रेसिका केल, जिप्सोफिला, गुलदावरी समेत 20 तरह के फूलों की खेती होती है जो महंगे होटल, धार्मिक अनुष्ठानों और साज-सज्जा के काम में आते हैं।
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किसान आत्म स्वरूप को सम्मान
आत्म स्वरूप को फूलों की खेती के लिए 100 से अधिक सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें वाइब्रेंट गुजरात में भी जाने का मौका मिला और वे 3 वर्षों तक ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के नेशनल एडवाइज़री कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं।
शहर जाने का नहीं सोच रहे युवा
आत्म स्वरूप के नक्शे कदम पर अब गांव के युवाओं ने भी फ्लोरीकल्चर की राह पर चलने का फैसला लिया है। पढ़ाई करने के बाद वे इस कार्य में जुट रहे हैं जो उन्हें बढ़िया आमदनी दे रहा। इससे वे शहरों की ओर जाने का तो सोच ही नहीं रहे बल्कि दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं।
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फूलों के गांव नाम से मशहूर महोग
महोग गांव में जहां तक आपकी नजर जाएगी, वहां तक आपको पॉलीहाउस ही नजर आएंगे जिनमें फूलों की खेती की जा रही है। यही कारण है कि इस गांव को फूलों का गांव भी कहा जाता है।
