शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसी के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने नशे को हराने के लिए एक बड़े जन आंदोलन की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान से स्टेट लेवल की 'चिट्टा मुक्ति वॉकथन' को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया है।
जड़ से खत्म करना है नशा
'चिट्टा मुक्ति वॉकथन' का उद्देश्य नशा व नशा माफिया को जड़ से खत्म करना है। इसके लिए सरकार ने ‘चिट्टा छोड़ो, जीवन अपनाओ, कदम से कदम मिलाकर चिट्टा मुक्त नया हिमाचल’ नारा दिया है।
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हर जिले में होगा कार्यक्रम
इस कार्यक्रम में आम जनता, छात्र, सामाजिक संगठन व स्वयंसेवक सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। शिमला में मुख्य आयोजन के बाद प्रदेश के सभी जिलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बढ़ गई सरकार की चिंता
बीते कुछ सालों में हिमाचल में चिट्टा व अन्य नशा तेजी से बढ़ा है। चिट्टे की तस्करी ने सरकार और पुलिस दोनों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में सरकार ने नशा तस्करी के खिलाफ बड़ा जन आंदोलन शुरू कर दिया है।
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हर जिले में निवारण केंद्र
कुल्लू, ऊना, हमीरपुर व कांगड़ा जिलों में पुरुषों के लिए पहले से ही 4 नशा निवारण केंद्र हैं। वहीं कुल्लू में महिलाओं के लिए एक केंद्र चल रहा है। वहीं अब सभी जिलों में जिला नशा निवारण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
क्या कहते हैं पुलिस के आंकड़े ? (2023–2025)
- 1140 NDPA मामलों में 1803 की गिरफ्तारी
- 919 किलो चरस
- 32.9 किलो हेरोइन
- 1632 किलो पोपी हस्क
- 89.6 किलो अफीम सहित लाखों कैप्सूल–टैबलेट्स बरामद
- भांग के लगभग 69.76 लाख पौधे नष्ट किए गए
- बीते तीन साल में 35.95 करोड़ की संपत्ति कुर्क
- साल 2023 में 4.87 करोड़, 2024 में 24.42 करोड़,
- 2025 में अब तक 6.66 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क
- 7.74 करोड़ की संपत्तियों को कुर्की की पुष्टि के लिए भेजा
- पुलिस ने ऐसी कुल 1214 संपत्तियां चिह्नित कर रखी हैं
