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June 1, 2026
हिमाचल: दिग्गज नेता भी नहीं बचा पाए परिवार की साख, पूर्व मंत्रियों की बेटियां हारीं जिला परिषद चुनाव
कौल सिंह ठाकुर की राजनीतिक विरासत को झटका, बेटी चंपा जिला परिषद चुनाव हारीं
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला परिषद चुनाव के नतीजों ने कई बड़े राजनीतिक चेहरों को झटका दिया है। कांग्रेस की जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर को कोटली वार्ड से करारी हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा समर्थित उम्मीदवार हेमलता ने उन्हें बड़े अंतर से हराकर मंडी की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है।
चंपा ठाकुर की हार इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह लगातार पांचवीं बार जिला परिषद चुनाव जीतने के इरादे से मैदान में उतरी थीं। इससे पहले वह चार बार अलग-अलग वार्डों से जिला परिषद सदस्य चुनी जा चुकी थीं और जिला परिषद अध्यक्ष का पद भी संभाल चुकी हैं।
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कोटली वार्ड में भाजपा समर्थित प्रत्याशी हेमलता को कुल 8659 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी चंपा ठाकुर 6195 वोट ही हासिल कर सकीं। इस तरह हेमलता ने 2464 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह हार केवल एक चुनावी हार नहीं, बल्कि मंडी जिले में बदलते राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत है। चंपा ठाकुर लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति का बड़ा चेहरा रही हैं, लेकिन इस बार मतदाताओं ने अलग फैसला सुनाया।
चंपा ठाकुर दो बार मंडी सदर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं। हालांकि दोनों बार उन्हें भाजपा नेता और मंत्री रहे अनिल शर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। अब जिला परिषद चुनाव में मिली हार ने उनके राजनीतिक सफर को एक और बड़ा झटका दिया है।
मंडी जिले के धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र से भी एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह की बेटी वंदना गुलेरिया टीहरा वार्ड से चुनाव हार गईं। उन्हें मात्र 47 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
टीहरा वार्ड में मतगणना के दौरान काफी हंगामा भी हुआ। वंदना गुलेरिया ने मतों की दोबारा गिनती की मांग की, जिसके बाद रिकाउंटिंग भी करवाई गई। बावजूद इसके परिणाम में कोई बदलाव नहीं हुआ और उन्हें हार स्वीकार करनी पड़ी।
मंडी जिला परिषद चुनाव के परिणामों ने साफ कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने कई स्थापित राजनीतिक परिवारों को भी चुनौती दी है। कौल सिंह ठाकुर और महेंद्र सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के परिवार से जुड़े उम्मीदवारों की हार ने चुनाव परिणामों को और अधिक चर्चित बना दिया है।