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June 1, 2026

हिमाचल : मशहूर गायक विक्की चौहान की पत्नी बुरी तरह हारी, नेहा मेहता ने 2,891 वोटों से किया पराजित

जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए जिला परिषद चुनावों के परिणामों ने कई राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दी है। शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र में जिला परिषद वार्ड से सामने आया चुनाव परिणाम पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

विक्की चौहान की पत्नी हारी

सरस्वती नगर की इस सीट पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार श्वेता चौहान को कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी नेहा मेहता के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। नेहा मेहता ने 2891 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर न केवल अपनी राजनीतिक मजबूती साबित की।

 

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करारी हार का करना पड़ा सामना

वहीं, कांग्रेस के इस पारंपरिक गढ़ को भी सुरक्षित रखने में सफलता हासिल की। यह सीट चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रदेश की सबसे चर्चित जिला परिषद सीटों में शामिल हो गई थी। इसकी सबसे बड़ी वजह हिमाचल के मशहूर लोकगायक विक्की चौहान पत्नी श्वेता चौहान की उम्मीदवारी थी।

विक्की लगातार कर रहे थे समर्थन

भाजपा को उम्मीद थी कि क्षेत्र में विक्की चौहान की व्यापक लोकप्रियता और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पहचान का लाभ चुनावी मैदान में देखने को मिलेगा। चुनाव प्रचार के दौरान विक्की चौहान लगातार अपनी पत्नी के समर्थन में सक्रिय दिखाई दिए।

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लोगों से की अपील

उन्होंने जनसंपर्क अभियानों में हिस्सा लिया, लोगों से मुलाकात की और सोशल मीडिया के माध्यम से भी मतदाताओं से समर्थन और आशीर्वाद की अपील की। हालांकि चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया कि स्थानीय चुनावों में मतदाता लोकप्रिय चेहरों या पहचान के आधार पर फैसला नहीं करते। लोग क्षेत्रीय मुद्दों और राजनीतिक समीकरणों को भी समान महत्व देते हैं।

राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल

सरस्वती नगर वार्ड लंबे समय से कांग्रेस का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है। यह क्षेत्र प्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के राजनीतिक प्रभाव वाले इलाकों में शामिल है। ऐसे में इस चुनाव को केवल जिला परिषद का सामान्य चुनाव नहीं माना जा रहा था, बल्कि इसे स्थानीय राजनीतिक प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा था।

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कांग्रेस के गढ़ में BJP की जीत...

कांग्रेस के लिए इस सीट को बचाए रखना बेहद महत्वपूर्ण था, जबकि भाजपा यहां जीत दर्ज कर एक मजबूत राजनीतिक संदेश देना चाहती थी। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। भाजपा समर्थित उम्मीदवार श्वेता चौहान ने मतदाताओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास किया।

श्वेता चौहान ने की खूब मेहनत

उन्होंने विभिन्न बैठकों और जनसभाओं में अपने शिक्षा और पेशेवर अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा था कि उनका लक्ष्य राजनीति के माध्यम से क्षेत्र के विकास में योगदान देना है। उन्होंने स्वयं को केवल एक चर्चित कलाकार की पत्नी के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय समाज सेवा और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने वाली उम्मीदवार के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।

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समस्याओं को बनाया चुनावी मुद्दा

दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार नेहा मेहता ने स्थानीय स्तर पर मजबूत जनसंपर्क बनाए रखा। उन्होंने क्षेत्र के लोगों के बीच लगातार सक्रिय रहकर विकास, जनसुविधाओं और स्थानीय समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाया। चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि उन्हें क्षेत्र के मतदाताओं का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ।

नेहा ने 2,891 वोटों से किया परस्त

2891 मतों के अंतर से मिली जीत को राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के लिए बड़ी सफलता मान रहे हैं। स्थानीय निकाय चुनावों में इतने बड़े अंतर से जीत दर्ज करना यह दर्शाता है कि पार्टी ने अपने पारंपरिक समर्थन आधार को मजबूती से बनाए रखा है। वहीं भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी ने इस सीट पर विशेष रणनीति के साथ चुनाव लड़ा था।

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समर्थकों में भारी उत्साह

चुनाव परिणाम के बाद क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। समर्थकों ने जीत का जश्न मनाते हुए इसे संगठन की एकजुटता और जनता के विश्वास की जीत बताया। वहीं भाजपा समर्थकों का मानना है कि चुनाव परिणाम से सीख लेकर भविष्य की रणनीति को और मजबूत बनाया जाएगा।

चुनावी मुकाबले ने क्या किया साबित?

इस पूरे चुनावी मुकाबले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि स्थानीय निकाय चुनावों में जमीनी जुड़ाव, क्षेत्रीय मुद्दों की समझ और मतदाताओं के साथ निरंतर संपर्क सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोकप्रियता और पहचान चुनाव को चर्चा में जरूर ला सकती है। मगर अंतिम फैसला मतदाता अपने क्षेत्र की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही करते हैं।

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