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June 1, 2026

हिमाचल के इस राजा की राजनीति में धमाकेदार एंट्री : जिला परिषद चुनाव जीते- लगभग 10 हजार वोटों से मारी बाजी

चमियाना की हॉट सीट पर खुश विक्रम सेन का जलवा

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khush vikram sen

शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला परिषद चुनाव की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीट चमियाना वार्ड से आखिरकार जनता का फैसला सामने आ गया है। क्योंथल रियासत (जुन्गा राजघराने) के उत्तराधिकारी खुश विक्रम सेन ने अपने पहले ही चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए राजनीति में जोरदार पदार्पण किया है। 

 9981 वोटों के बड़े अंतर से जीत

खुश विक्रम सेन ने अपने प्रतिद्वंद्वी भूपेंद्र सिंह को 9981 वोटों के बड़े अंतर से हराकर जिला परिषद में शानदार एंट्री की है। मतगणना के अनुसार खुश विक्रम सेन को कुल 13,752 वोट प्राप्त हुए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी भूपेंद्र सिंह को 3,771 वोट मिले। इस बड़े अंतर की जीत ने पूरे शिमला जिला ही नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा छेड़ दी है।

पंचायत चुनाव की सबसे चर्चित 'हॉट सीट' थी चमियाना

चमियाना वार्ड का चुनाव इस बार पूरे हिमाचल में चर्चा का विषय बना हुआ था। चुनाव भले ही पार्टी चिन्ह पर नहीं लड़ा गया, लेकिन इसे भाजपा और कांग्रेस दोनों की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा था।

 

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एक ओर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के करीबी माने जाने वाले भूपेंद्र सिंह मैदान में थे, जबकि दूसरी तरफ क्योंथल रियासत के युवा उत्तराधिकारी खुश विक्रम सेन चुनाव लड़ रहे थे। यही वजह रही कि यह मुकाबला पंचायत चुनाव से बढ़कर राजनीतिक प्रभाव और विरासत की लड़ाई बन गया था।

राजपरिवार से राजनीति तक का सफर

29 वर्षीय खुश विक्रम सेन दिवंगत वीर विक्रम सेन के पुत्र हैं और क्योंथल रियासत की नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी माता विजय ज्योति सेन भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रही हैं और वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर कुसुम्पटी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं।

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उच्च शिक्षा प्राप्त खुश विक्रम सेन ने ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से डिप्लोमेसी, लॉ एंड बिजनेस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़कर काम किया, जिसकी चर्चा उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान भी की।

विक्रमादित्य सिंह से भी जुड़ा है पारिवारिक रिश्ता

खुश विक्रम सेन का संबंध हिमाचल की एक और प्रमुख राजनीतिक विरासत से भी जुड़ा है। वे लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के ममेरे भाई हैं। ऐसे में इस चुनाव को केवल जिला परिषद का चुनाव नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीतिक और राजसी विरासतों की नई पीढ़ी की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा था।

पहली ही चुनावी परीक्षा में बड़ी सफलता

चुनाव प्रचार के दौरान खुश विक्रम सेन लगातार जनसेवा, गांवों के विकास, किसानों की समस्याओं और युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे। जनता ने भी उन पर भरोसा जताते हुए रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाया।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत के साथ खुश विक्रम सेन ने न केवल जिला परिषद में प्रवेश किया है, बल्कि हिमाचल की राजनीति में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा दी है।

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