शिमला। हिमाचल प्रदेश के बागवानों के लिए इस बार का सीजन काफी मुश्किल भरा रहा। सर्दियों में बर्फबारी और बारिश कम हुई, फ्लावरिंग के समय मौसम बार-बार बदला और गर्मियों में कई जगह ओलावृष्टि ने फसलों को नुकसान पहुंचाया। इससे सेब, प्लम, नाशपाती और दूसरे स्टोन फ्रूट की पैदावार पर बड़ा असर पड़ा। कई किसानों को लग रहा था कि इस बार उनकी मेहनत बेकार चली जाएगी, लेकिन अब मंडियों से मिल रहे अच्छे दामों ने उन्हें राहत की उम्मीद दी है।

प्लम और नाशपाती बने इस बार के असली स्टार

इस बार मंडियों में सबसे ज्यादा चर्चा सेब की नहीं, बल्कि प्लम और नाशपाती की हो रही है। फसल कम होने के कारण इन फलों की मांग काफी बढ़ गई है और कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं। जिस प्लम को पहले सेब से कम अहमियत मिलती थी, वही अब बड़े शहरों की मंडियों में सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है।

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प्लम और नाशपाती के दामों ने बनाया रिकॉर्ड

11 जुलाई को हुई बोली में अच्छी क्वालिटी के 2 किलो प्लम के बॉक्स की कीमत 300 रुपये तक पहुंच गई। वहीं नाशपाती के हाफ बॉक्स 1800 से 2200 रुपये और फुल बॉक्स 3500 रुपये तक बिके। कारोबारियों का कहना है कि महाराष्ट्र, गुजरात और दूसरे राज्यों में हिमाचली नाशपाती की मांग बहुत ज्यादा है, इसलिए मंडियों में अच्छे दाम मिल रहे हैं।

कम फसल, लेकिन अच्छे रेट से मिली राहत

कम उत्पादन की वजह से किसानों को नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन बाजार में ऊंचे दाम मिलने से उनकी कुछ हद तक भरपाई हो रही है। जिन बागवानों को इस बार कमाई खत्म होने का डर था, उन्हें अब उम्मीद है कि अच्छी कीमतों से नुकसान थोड़ा कम हो जाएगा।

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बागवान बोले- मौसम लगातार दे रहा है धोखा

शिमला जिले की नावर वैली टिक्कर के बागवान रिपुल ने बताया कि इस बार उनकी नाशपाती की फसल काफी कम हुई है। जहां पहले 300 से 400 बॉक्स निकलते थे, वहीं इस बार सिर्फ 200 से 250 बॉक्स ही होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि मोटी डंडी नाशपाती का हाफ बॉक्स 1200 रुपये और हॉफ रेड नाशपाती का हाफ बॉक्स 1800 रुपये तक बिका।

छह साल से मौसम बना सबसे बड़ी चिंता

रिपुल का कहना है कि पिछले छह सालों से मौसम बागवानों का साथ नहीं दे रहा। सर्दियों में न बारिश हो रही है और न ही अच्छी बर्फबारी। ऊपर से ओलावृष्टि भी फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। उनका कहना है कि अगर मौसम का यही हाल रहा तो आने वाले समय में बागवानी करना और मुश्किल हो जाएगा।

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आढ़ती बोले- बारिश से कम आया माल, बढ़ गए दाम

ढली मंडी आढ़ती एसोसिएशन के उपप्रधान अमन सूद ने बताया कि मंडी में इस समय ब्लैक अंबेर और फॉरच्यून प्लम आ रहा है, जिसकी 2 किलो की पेटी 100 से 300 रुपये तक बिक रही है। लगातार बारिश के कारण मंडी में कम माल पहुंचा, जिससे नाशपाती के दाम और बढ़ गए। हाफ बॉक्स 1800 से 2200 रुपये और फुल बॉक्स 3500 रुपये तक बिक रहा है।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा जा रहे हिमाचली फल

अमन सूद के मुताबिक हिमाचल से सबसे ज्यादा नाशपाती महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब भेजी जा रही है। वहीं प्लम की सप्लाई पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र की मंडियों में हो रही है। इन राज्यों में हिमाचली फलों की मांग लगातार बनी हुई है।

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ढली मंडी से हर दिन हो रही सप्लाई

ढली मंडी से रोजाना प्लम की छोटी-बड़ी पैकिंग गुजरात, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों में भेजी जा रही है। हालांकि अब प्लम का सीजन खत्म होने की ओर है। दूसरी तरफ नाशपाती की फसल कम होने की वजह से रोजाना सिर्फ 1000 से 1500 बॉक्स ही बाहर भेजे जा रहे हैं, जबकि अच्छी फसल के समय यही संख्या 8 से 10 हजार बॉक्स तक पहुंच जाती थी।

नाशपाती की फसल सिर्फ 20 से 30 फीसदी

सेब कारोबारी अमन सूद का कहना है कि इस बार नाशपाती की फसल सामान्य से सिर्फ 20 से 30 फीसदी ही हुई है। यही वजह है कि बाहर के राज्यों की मांग पूरी नहीं हो पा रही, जिससे कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं।

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ढली मंडी में आज के ताजा भाव

ढली फल मंडी में ब्लैक अंबेर प्लम (2 किलो बॉक्स) 80 से 200 रुपये, फॉरच्यून प्लम (2 किलो बॉक्स) 150 से 300 रुपये, नाशपाती का हाफ बॉक्स 1200 से 2000 रुपये, फुल बॉक्स 1800 से 3500 रुपये और टाइडमैन सेब का 20 किलो बॉक्स 1100 से 2100 रुपये तक बिक रहा है।

बारिश के बाद बढ़ी प्लम की कीमत

सेब कारोबारी मोहम्मद आसिफ ने बताया कि इस बार स्टोन फ्रूट की फसल कम रही, लेकिन अच्छे दाम मिलने से कारोबार बढ़िया रहा। उनकी गोजा प्लम की फसल 50 से 120 रुपये प्रति किलो तक बिकी और इसकी सप्लाई गुजरात व महाराष्ट्र भेजी जा रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि फल समय से पहले न तोड़ें और उन्हें जल्दी पकाने के लिए किसी तरह के स्प्रे का इस्तेमाल न करें।

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हिमाचल में लगातार बढ़ रहा बागवानी का दायरा

हिमाचल प्रदेश में करीब 2.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी की जाती है, जो राज्य के कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 26 फीसदी है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सेब का है, जो कुल फल उत्पादन में करीब 78 फीसदी योगदान देता है। इसके अलावा स्टोन फ्रूट, ड्राई फ्रूट और सिट्रस फलों की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है।

बढ़ रहा रकबा, लेकिन उत्पादन नहीं

प्रदेश में हर साल बागवानी का क्षेत्र तो बढ़ रहा है, लेकिन उत्पादन उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पा रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह लगातार बदलता मौसम माना जा रहा है। मौसम की अनिश्चितता अब हिमाचल के बागवानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। हालांकि इस बार कम फसल के बावजूद प्लम और नाशपाती के अच्छे दामों ने किसानों को थोड़ी राहत जरूर दी है।

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