शिमला। मार्च की शुरुआत होते ही हिमाचल में मौसम ने करवट तो ली है, लेकिन यह बदलाव राहत से ज्यादा चिंता लेकर आया है। प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से पांच डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। फरवरी में सामान्य से 85 से 90 प्रतिशत तक कम वर्षा होने का असर अब खेतों और बागानों में साफ दिखाई देने लगा है। किसान और बागवान आने वाले दिनों को लेकर असमंजस में हैं।

तापमान में बढ़ोतरी से सूखे जैसे हालात

सोमवार को प्रदेश भर में धूप खिली रही, जिससे अधिकतम तापमान में करीब एक डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोतरी दर्ज की गई। कई जिलों में दिन के समय गर्मी का एहसास होने लगा है। सबसे अधिक तापमान ऊना में 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शिमला में अधिकतम तापमान 19 डिग्री, सुंदरनगर में 27.8, भुंतर में 26.3 और धर्मशाला में 24.1 डिग्री दर्ज किया गया। तापमान में इस असामान्य बढ़ोतरी से गेहूं, जौ और अन्य रबी फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

 

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सेब बागवानों की बढ़ी चिंता

प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में सेब की फसल के लिए सर्दियों में पर्याप्त ठंड और बर्फबारी जरूरी मानी जाती है। इस बार बर्फबारी और बारिश की कमी से ‘चिलिंग आवर’ पूरे न होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे सेब उत्पादन पर असर पड़ सकता है। बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मार्च में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो फूल आने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

 

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सात से नौ मार्च तक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार सात, आठ और नौ मार्च को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा या हिमपात हो सकता है। हालांकि फिलहाल इसकी सक्रियता कमजोर मानी जा रही है। ऐसे में व्यापक राहत की उम्मीद कम है।

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शिंकुला के लिए प्रशासन की गाइडलाइन

इधर लाहौल स्पीति में पर्यटकों के लिए शिंकुला दर्रे की आवाजाही को लेकर प्रशासन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पर्यटक सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक अपने वाहनों में पहियों पर स्नो चेन लगाकर शिंकुला जा सकेंगे। पुलिस अधीक्षक शिवानी मेहला ने यात्रियों से मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही सफर पर निकलने की अपील की है।

अगर मार्च में भी मौसम मेहरबान नहीं हुआ तो हिमाचल की खेती और बागवानी को बड़ा झटका लग सकता है। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ कितना असर दिखाता है, इस पर किसानों की नजरें टिकी हैं।

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