शिमला। हिमाचल प्रदेश में पिछले करीब दो दशकों से ग्रामीण विकास की रीढ़ बनी मनरेगा योजना अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गई है। अप्रैल माह के खत्म होते ही यह योजना इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगी।
खत्म होने जा रहा मनरेगा
इसकी जगह एक नई योजना लागू होने की तैयारी है। जिसे “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबीजी राम जी) एक्ट 2025” के नाम से जाना जाएगा।
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अगले महीने से नया सिस्टम लागू
जानकारी के अनुसार, इस नई योजना को 1 अप्रैल से लागू करने की प्रारंभिक योजना थी। मगर राज्य स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक आवश्यक तैयारियां पूरी न हो पाने के कारण मनरेगा को अस्थायी रूप से 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया। यानी इस पूरे महीने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य अभी भी मनरेगा के तहत ही चलते रहेंगे।
कब शुरु हुआ हिमाचल में मनरेगा?
अगर पीछे मुड़कर देखें तो हिमाचल प्रदेश में मनरेगा की शुरुआत वर्ष 2005 में चंबा और सिरमौर जिलों से हुई थी। इसके बाद कांगड़ा और मंडी में यह योजना लागू हुई और वर्ष 2008 तक प्रदेश के सभी 12 जिलों में इसका विस्तार हो गया। वर्षों तक इस योजना ने गांवों में सड़कों, जल संरक्षण, भूमि सुधार और अन्य आधारभूत ढांचे के निर्माण में अहम भूमिका निभाई।
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मजदूरों को समय पर मजदूरी ना मिलना
हालांकि, बीते कुछ वर्षों में मनरेगा की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आई। मजदूरों को समय पर मजदूरी न मिलना, सामग्री भुगतान में देरी जैसी समस्याएं सामने आईं, जिससे योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे। बावजूद इसके, हाल ही में लंबित भुगतानों को निपटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।
परिवारों का चला गुजारा
कोरोना काल के दौरान यह योजना ग्रामीण परिवारों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं थी। जब शहरों में रोजगार ठप हो गए थे और लोग अपने गांवों की ओर लौट आए थे, तब मनरेगा ने उन्हें घर के पास ही काम दिया। इससे न सिर्फ उनके परिवारों का गुजारा चला, बल्कि गांवों में भी विकास कार्यों को गति मिली।
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तैयारियों में जुटा प्रशासन
अब सभी की नजरें नई योजना वीबीजी राम जी पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह योजना भी मनरेगा की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ बना पाएगी या नहीं। फिलहाल, प्रशासन इसकी तैयारियों में जुटा हुआ है।
नई योजना होगी लागू
ADC सोलन राहुल जैन के अनुसार, मनरेगा को 30 अप्रैल तक बढ़ाया गया है और इसके बाद नई योजना लागू की जाएगी। आने वाले समय में यह बदलाव ग्रामीण रोजगार और विकास की दिशा तय करेगा।
