#विविध
May 22, 2026
हिमाचल में बढ़ा सरकारी स्कूलों का क्रेज, प्राइवेट स्कूल छोड़ एडमिशन लेने पहुंच रहे हजारों छात्र
CBSC वाली सरकारी स्कूल में बढ़ रही है बच्चों की संख्या
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों को लेकर इस बार राहत भरी और खुश करने वाली खबर सामने आई है। लंबे समय से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार घट रही थी, लेकिन अब पहली बार हालात बदलते नजर आ रहे हैं। प्रदेश के हजारों अभिभावकों ने निजी स्कूलों की बजाय सरकारी स्कूलों पर भरोसा जताया है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने और उन्हें CBSE से जोड़ने का फैसला माना जा रहा है।
प्रदेश सरकार ने बच्चों की घटती संख्या को रोकने और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए 158 सरकारी स्कूलों को CBSE बोर्ड से संबद्ध किया है। इस फैसले का असर पहले ही साल में देखने को मिल गया है। अब बड़ी संख्या में बच्चे निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार इस साल 11,721 विद्यार्थियों ने प्राइवेट स्कूलों से नाम कटवाकर CBSE से जुड़े सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है।
अगर कुल दाखिलों की बात करें तो शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए इन स्कूलों में अब तक 84,420 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इनमें 11,525 विद्यार्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने दूसरे सरकारी स्कूल छोड़कर CBSE वाले सरकारी स्कूलों का रुख किया है। यानी कुल मिलाकर अब तक 23,247 नए दाखिले बढ़ चुके हैं। इससे साफ है कि अब लोगों का भरोसा सरकारी स्कूलों की ओर दोबारा लौटने लगा है।
सबसे ज्यादा दाखिले मंडी, शिमला, चंबा, सिरमौर और सोलन जिलों के स्कूलों में हुए हैं। इन जिलों के कई स्कूलों में बच्चों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि एक-एक कक्षा में दो-दो सेक्शन बनाने पड़े हैं। पहले जहां कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बेहद कम हो गई थी, वहीं अब वहां फिर से रौनक लौटती दिखाई दे रही है।
दरअसल, पिछले 11 सालों में सरकारी स्कूलों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही थी। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्राइमरी से लेकर जमा दो तक करीब 9 लाख 59 हजार 147 विद्यार्थी पढ़ते थे, लेकिन वर्ष 2024-25 तक यह संख्या घटकर 6 लाख 5 हजार 342 रह गई। यानी करीब 3 लाख 53 हजार 805 विद्यार्थी कम हो गए। बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने लगे थे।
शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकार की नई योजनाओं का असर अब दिखाई देने लगा है। पहले सरकारी स्कूल में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की गईं और अब CBSE से जुड़ने के बाद पढ़ाई का माहौल भी बेहतर हुआ है। अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई, अच्छी सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी वजहों से अब अभिभावकों का भरोसा फिर से सरकारी स्कूलों पर बढ़ने लगा है।
अब सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है, इसलिए शिक्षकों की जरूरत भी ज्यादा महसूस हो रही है। कई स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ने के कारण अलग-अलग सेक्शन बनाने पड़े हैं। ऐसे में सरकार को अब और टीचर लगाने होंगे। शिक्षा विभाग ने सरकार से करीब 1500 नए पद बनाने की मांग की है। इस मुद्दे पर 22 मई को होने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा हो सकती है और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।