#विविध
May 22, 2026
देवता महासू पर बनी फिल्म ने CANNES फेस्टिवल में दिखाया जलवा- हिमाचल की बेटी का कमाल
सिर्फ प्रेम कहानी नहीं, पहाड़ों के दर्द की कहानी
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश की देव संस्कृति अब सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसकी गूंज अब दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल “कांन्स” तक पहुंच चुकी है। सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र की रहने वाली फिल्ममेकर अनुशी शर्मा की फिल्म “खूंटा” की स्क्रीनिंग कांन्स फिल्म फेस्टिवल में हुई है। इस उपलब्धि के बाद पूरे हिमाचल में खुशी का माहौल है और लोग इसे प्रदेश की संस्कृति और पहचान के लिए एक बड़ा सम्मान मान रहे हैं।
अनुशी शर्मा का कहना है कि “खूंटा” कोई साधारण लव स्टोरी नहीं है। फिल्म में एक ऐसी महिला की कहानी दिखाई गई है, जो अपने लापता पति का इंतजार करती है। लेकिन कहानी सिर्फ इंतजार तक सीमित नहीं रहती। इसमें प्रकृति, आस्था, विरासत और विनाश के बीच का संघर्ष भी दिखाया गया है, जिसे पहाड़ों में रहने वाले लोग हर दिन महसूस करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह फिल्म पहाड़ों, नदियों और हिमालय की संस्कृति से जुड़ी हुई है। फिल्म में महासू महाराज की आस्था, गांवों की जिंदगी और प्रकृति के साथ लोगों के रिश्ते को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है।
फिल्म में हाटी संस्कृति, जौनसार की परंपराएं और गद्दी समुदाय की जीवनशैली को भी दिखाया गया है। फिल्म यह बताती है कि कैसे नदियां लोगों को जीवन देती हैं और परंपराएं समाज को जोड़कर रखती हैं, लेकिन जब प्रकृति का रौद्र रूप सामने आता है तो सब कुछ बदल जाता है। यही “खूंटा” का सबसे बड़ा संदेश है।
अनुशी शर्मा ने इस फिल्म को सिर्फ बनाया नहीं, बल्कि उसे महसूस भी किया है। फिल्म के हर दृश्य में सिरमौर की संस्कृति और गांवों की झलक दिखाई देती है। पहाड़ी गांव, देव परंपराएं, लोगों की सादगी और हिमालय की खूबसूरती फिल्म को खास बनाती है।
अनुशी का कहना है कि सिरमौर को हमेशा विकास और पहचान के मामले में पीछे माना गया, लेकिन वह चाहती हैं कि दुनिया सिरमौर की असली खूबसूरती और प्रतिभा को पहचाने। यही वजह है कि उन्होंने अपनी फिल्म में अपने गांव, पहाड़ और संस्कृति को मुख्य जगह दी।
अनुशी चाहती हैं कि हिमाचल में भी एक मजबूत फिल्म इंडस्ट्री बने, ताकि यहां के युवाओं और कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मुंबई न जाना पड़े। उनका मानना है कि हिमाचल में टैलेंट की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ मंच और मौके की है।
शिलाई और सोलन में पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुशी ने साधारण नौकरी करने के बजाय थिएटर की दुनिया चुनी। उन्होंने करीब पांच साल तक सोलन के थिएटर ग्रुप्स में काम किया और फिर अपने सपनों को पूरा करने मुंबई चली गईं।
बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड और गॉडफादर के उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया। कई बार रिजेक्शन मिले, मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। टीवी इंडस्ट्री में काम करते हुए भी उनके दिल में हमेशा अपने पहाड़ों की कहानी जिंदा रही और वही आगे चलकर “खूंटा” बनी।
फिल्म की शूटिंग सिरमौर के द्राबिल, कुआनु और आसपास के गांवों में करीब एक महीने तक चली। इस दौरान गांव के लोगों ने पूरी टीम का साथ दिया। लोगों ने अपने घर, पारंपरिक कपड़े और धार्मिक कार्यक्रम तक शूटिंग के लिए उपलब्ध करवाए। अनुशी का कहना है कि परिवार और गांव वालों के सहयोग के बिना यह फिल्म बन पाना संभव नहीं था।
अनुशी ने बताया कि न्यूयॉर्क बेस्ड इंडियन-अमेरिकन निर्माता मुकेश मोदी उनकी स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद इस प्रोजेक्ट से जुड़े। उन्हें हिमाचल की संस्कृति और कहानी इतनी पसंद आई कि उन्होंने फिल्म को पूरा समर्थन दिया। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बनी इस फिल्म की शूटिंग पूरी तरह हिमाचल के ग्रामीण इलाकों में हुई है।
अनुशी का कहना है कि फिल्म में कोई बड़ा स्टारडम नहीं है। खूंटा का असली हीरो हिमालय, उसकी नदियां, मंदिर, परंपराएं और वहां का संघर्ष है। फिल्म में स्थानीय बोली और परंपराओं को पूरी सच्चाई के साथ दिखाया गया है।
16 मई 2026 को “खूंटा” का प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ। यह हिमाचल के लिए एक ऐतिहासिक पल था, क्योंकि यह पहली हिमाचली फिल्म बनी जिसे कान्स फिल्म मार्केट प्रीमियर में जगह मिली। शिलाई के छोटे से गांव से निकलकर कान्स के रेड कार्पेट तक पहुंचना अनुशी शर्मा के लिए किसी सपने के सच होने जैसा था।
करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बनी “खूंटा” सितंबर में रिलीज हो सकती है। फिल्म के गीतों में हिमाचल की लोक संस्कृति की झलक सुनाई देगी। वहीं फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और विजुअल्स को भी बेहद खूबसूरती से तैयार किया गया है।
आज अनुशी शर्मा सिर्फ एक फिल्ममेकर नहीं, बल्कि हिमाचल की नई सिनेमाई पहचान बन चुकी हैं। वह दुनिया को यह बताना चाहती हैं कि हिमालय सिर्फ खूबसूरत पहाड़ नहीं, बल्कि भावनाओं, संघर्षों और संस्कृति की एक जीवित दुनिया है।