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May 22, 2026

हिमाचल : शादीशुदा महिला प्रेमिका की कस्टडी मांगने हाईकोर्ट पहुंचा लिव इन पार्टनर, जानें क्या मिला जवाब

याचिकाकर्ता ने दिया पुराने फैसलों का हवाला

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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया, जहां एक युवक अपनी शादीशुदा प्रेमिका की कस्टडी मांगते हुए अदालत पहुंच गया। युवक ने दावा किया कि महिला खतरे में है और उसे मुक्त कराया जाए। सुनवाई के दौरान जब दोनों के लिव-इन रिश्ते की बात सामने आई तो हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने साफ कहा कि विवाहित महिला और उसके प्रेमी के रिश्ते को कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

अदालत वैवाहिक जीवन में नहीं कर सकती हस्तक्षेप

दरअसल, अदालत ने शादीशुदा महिला की कस्टडी को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया।

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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि महिला अपने कानूनी पति के साथ रह रही है, ऐसे में अदालत वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

नहीं दी जा सकती न्यायिक मान्यता

कोर्ट ने टिप्पणी की कि विवाह के बावजूद किसी अन्य व्यक्ति के साथ बना रिश्ता व्यभिचार की श्रेणी में आता है और उसे न्यायिक मान्यता नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता ने अदालत में दावा किया था कि महिला उसकी करीबी मित्र है और उसने संदेशों के जरिए पति व ससुराल पक्ष से खतरे की बात कही थी।

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इसी आधार पर महिला को मुक्त कराने की मांग की गई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि दोनों के बीच लिव-इन रिलेशनशिप था और उन्होंने एक कथित समझौता भी अदालत में पेश किया।

याचिकाकर्ता ने दिया पुराने फैसलों का हवाला

दूसरी ओर महिला की शादी पहले से हो चुकी है और उसका एक बच्चा भी है। अदालत ने कहा कि जब महिला अपने पति के साथ रह रही है तो ऐसे मामले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।

याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के लिव-इन और समलैंगिक संबंधों से जुड़े पुराने फैसलों का हवाला दिया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि वे फैसले अविवाहित वयस्कों के संदर्भ में थे, विवाहित महिला पर लागू नहीं होते।

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