शिमला। हिमाचल की पहाड़ियों में मानसिक तनाव का तूफान तेजी से उठ रहा है। जाने-अनजाने, आज हर परिवार कड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है। अस्पतालों के बाहर लंबी कतारें, डॉक्टरों की चिंताजनक रिपोर्ट और बढ़ती मानसिक बीमारियों की गिनती अब प्रदेश के दैनिक जीवन की गहराईयों तक पहुंच चुकी है। बच्चे पढ़ाई के बोझ से डरे हुए, युवा नशे के जाल में टूट रहे, और बुजुर्ग ऑनलाइन ठगी या आर्थिक संकट के बाद बेसहारा हो रहे हैं। हर वर्ग इस गंभीर संकट की चपेट में है।
शिमला से मंडी तक… हर अस्पताल में बढ़ती भीड़
हिमाचल प्रदेश के किसी भी जिला अस्पताल में चले जाइए OPD के बाहर लंबी कतारें खुद बता देती हैं कि लोग सिर्फ बुखार या दर्द की दवा लेने नहीं आए। इन चेहरों में चिंता है, घबराहट है, और लगातार बढ़ता मानसिक तनाव है। प्रदेश सरकार की नई रिपोर्ट इस डर को सच साबित करती है। सिर्फ एक साल में 5,830 नए मानसिक रोगी बढ़ गए। यह संख्या किसी भी राज्य के लिए चेतावनी से कम नहीं।
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नशे के चलते युवा हो रहे है डिप्रेशन का शिकार
नशे में फंसे युवा सबसे ज्यादा मानसिक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जब वे नशा छोड़ नहीं पाते, तो उनके मन में डर, बेचैनी और घबराहट बढ़ने लगती है। धीरे-धीरे यही हालत उन्हें डिप्रेशन तक ले जाती है। कई युवाओं की हालत इतनी बिगड़ जाती है कि परिवार भी समझ नहीं पाता कि मदद कैसे करें। डॉक्टर बताते हैं कि अब यह समस्या सिर्फ कुछ घरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे समाज पर असर डाल रही है। नशे और मानसिक तनाव का यह मिलाजुला खतरा हिमाचल के भविष्य के लिए गंभीर चिंता पैदा कर रहा है।
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बच्चों की आंखों में अब किताबों से ज्यादा चिंता
शिमला के IGMC के मनोचिकित्सा विभाग में डॉक्टर बताते हैं कि इस साल पढ़ाई के तनाव से परेशान बच्चों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। कई बच्चे प्रतिस्पर्धा की दौड़ में इतने उलझ गए हैं कि उनका बचपन जैसे कहीं खो गया है। माता-पिता बताते हैं कि बच्चे रात-रात भर पढ़ाई की चिंता में रोते रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पढ़ाई का बढ़ता दबाव अब सीधे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है।
ऑनलाइन ठगी ने बुजुर्गों को किया बेसहारा
कांगड़ा, सोलन और शिमला के कई बुजुर्ग तब अस्पताल पहुंचे जब उनके बैंक खातों से हजारों-लाखों रुपये अचानक गायब हो गए। अब गांवों के बुजुर्ग भी साइबर ठगों के निशाने पर हैं। सारी उम्र की बचत खो देने के बाद जो तनाव उन पर टूटता है, वह उनके मानसिक स्वास्थ्य को गहरा नुकसान पहुंचा रहा है। कई बुजुर्ग डर और चिंता में जी रहे हैं, क्योंकि ठगी के बाद उनके पास न पैसा बचता है और न ही मन की शांति।
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प्रदेश भर में 76 हजार से ज्यादा लोग मानसिक रोगी
वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 बताती है कि इस साल मानसिक समस्याओं से जूझते 76,237 लोग अस्पताल पहुंचे, जिनमें से 7,209 मरीजों को भर्ती तक करना पड़ा। पिछले साल यह संख्या 70,407 थी। आंकड़ों में यह बढ़ोतरी साफ दिखाती है कि मानसिक बीमारियां अब हिमाचल के पहाड़ों में तेजी से फैल रही हैं और हर उम्र के लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं।
1.82 करोड़ मरीज—हिमाचल का स्वास्थ्य सिस्टम दबाव में
जिलों के अस्पतालों में एक साल के भीतर 1,82,28,784 मरीज इलाज के लिए पहुंचे, और यह भारी संख्या बताती है कि प्रदेश का पूरा स्वास्थ्य तंत्र कितने बड़े दबाव में काम कर रहा है। MRI, CT स्कैन और X-ray जैसी जांचों के लिए लोगों को लंबी लाइनों में इंतजार करना पड़ रहा है
- MRI: 11,439
- CT स्कैन: 82,779
- अल्ट्रासाउंड: 2,63,265
- एक्स-रे: 15,04,925
ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि हिमाचल में बीमारियों के साथ-साथ जांचों का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है।
डॉक्टरों की चेतावनी: “हालात गंभीर हैं”
आईजीएमसी शिमला के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. दिनेश दत्त शर्मा साफ कहते हैं कि हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं। नशे की लत, आर्थिक परेशानियां, बच्चों पर पढ़ाई का दबाव, लगातार बढ़ती घबराहट और सामाजिक अलगाव—ये सभी कारण मिलकर हिमाचल को गहरे मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर धकेल रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले सालों में स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है।
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पहाड़ों की शांति के पीछे छिपा तूफान
पर्यटन की चमक, खूबसूरत पहाड़ और शांत वादियां हिमाचल बाहर से जितना सुकून भरा दिखता है, उसके भीतर एक बड़ा तूफान चल रहा है। मानसिक तनाव की ऐसी लहर फैल चुकी है, जिसमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग तीनों लड़खड़ा रहे हैं। पहाड़ों की शांति के पीछे छिपा यह सच बेहद चिंताजनक है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट परिवारों की जड़ों तक को हिला सकता है और आने वाली पीढ़ियों पर गहरा असर छोड़ सकता है।
