#विविध
November 24, 2025
हिमाचल कैबिनेट: EC की रोक को दरकिनार कर सुक्खू सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन का लिया फैसला
हिमाचल पंचायत चुनाव पर अब सुक्खू सरकार और चुनाव आयोग के बीच बढ़ेगा टकराव
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर हिमाचल पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इस बार इस हलचल के बढ़ने का कारण कैबिनेट बैठक में सुक्खू सरकार का लिया बडा फैसला है। आज की कैबिनेट बैठक में सीएम सुक्खू ने पंचायतों के पुनर्गठन करने का फैसला लिया है। जिसकी प्रक्रिया 12 दिसंबर से शुरू करने का फैसला लिया गया है।
वहीं दूसरी तरफ राज्य चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के एक विशेष प्रावधान का हवाला देते हुए प्रदेश भर में पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश जारी किया था। इसके साथ ही आयोग ने सभी जिलों के डीसी को चुनाव सामग्री उठाने का शेड्यूल भी जारी कर दिया है, जिससे साफ है कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई हैं।
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हालांकि इसी बीच सुक्खू मंत्रिमंडल ने अपनी बैठक में पंचायतों के पुनर्गठन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी देकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव आयोग की रोक के बावजूद सरकार द्वारा यह निर्णय लिए जाने से आने वाले दिनों में आयोग और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।
राज्य चुनाव आयोग ने आचार संहिता के एक क्लॉज का हवाला देते हुए कहा है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसी भी प्रकार के पुनर्गठन, सीमा परिवर्तन या संरचना में फेरबदल की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे कदम सीधे चुनावी माहौल और निष्पक्ष प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इसके मद्देनज़र आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि पंचायतों की वर्तमान सीमाओं और संरचनाओं में कोई बदलाव नहीं lकिया जाएगा।
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इसके विपरीत सुक्खू सरकार का मानना है कि कई पंचायतों का मौजूदा ढांचा जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है, इसलिए पुनर्गठन अत्यावश्यक है। कैबिनेट ने तर्क दिया कि यह कदम बेहतर प्रशासन और सुविधा विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर संकेत दिया है कि सरकार पंचायत चुनावों के मद्देनज़र प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के पक्ष में है।
चूंकि चुनाव आयोग पहले ही रोक लगा चुका है और चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है, इसलिए सरकार द्वारा लिया गया निर्णय आयोग के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देने जैसा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि सरकार औपचारिक अधिसूचना जारी करती हैए तो मामला कानूनी और प्रशासनिक विवाद में भी बदल सकता है।
कैबिनेट बैठक ने पुलिस विभाग में JOA (IT) के पांच नए पदों को भरने की मंजूरी दी गई है, जबकि धर्मशाला में डिजिटल फोरेंसिक सुविधा को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पांच पद स्वीकृत किए गए हैं।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन से संबंधित बड़ी राहत देते हुए सरकार ने वह शर्त समाप्त कर दी है, जिसके अनुसार 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले पात्र लोगों को यह पेंशन सरकारी कर्मचारी अभिभावक होने पर नहीं मिल पाती थी। इसके साथ ही राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत डीजल और पेट्रोल से चलने वाली एक हजार टैक्सियों को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी देने का भी निर्णय लिया गया है।