शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर अब सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। सुक्खू सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए ऑनलाइन व्यवहार भी उतना ही जिम्मेदार और अनुशासित होना चाहिए- जितना दफ्तर में अपेक्षित होता है।

सुक्खू सरकार की नई गाइडलाइन

हाल ही में शिमला की SDM ओशीन शर्मा से जुड़ा एक मामला सुर्खियों में आया था- जिसने पूरे प्रदेश में सरकारी अधिकारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर बहस छेड़ दी। इसी पृष्ठभूमि में अब सरकार ने विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके।

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माना जाएगा सेवा का उल्लंघन

संयुक्त सचिव नीरज कुमार द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि सभी सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संयमित भाषा और मर्यादित आचरण अपनाएं। आदेश में साफ तौर पर यह निर्देश दिया गया है कि कोई भी कर्मचारी बिना अनुमति किसी सरकारी दस्तावेज, फाइल, नोटशीट या संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक मंच पर साझा नहीं करेगा। इसे सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

क्या है सरकार का कहना?

इसके अलावा कर्मचारियों को किसी भी सरकारी नीति, फैसले या प्रशासनिक मुद्दे पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से भी रोका गया है। सरकार का मानना है कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि आम जनता में भ्रम की स्थिति भी पैदा कर सकती हैं।

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सोशल मीडिया का इस्तेमाल...

इसी के चलते सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना, नकारात्मक प्रचार या छवि को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी पोस्ट को अनुशासनहीनता के दायरे में रखा गया है।

क्या हैं नई गाइडलाइंस?

गाइडलाइंस में यह भी उल्लेख किया गया है कि-

  • अगर कोई कर्मचारी किसी विषय पर अपनी निजी राय रखना चाहता है- तो उसे स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि यह उसकी व्यक्तिगत राय है और इसका सरकार या उसके विभाग से कोई संबंध नहीं है। इस तरह की पारदर्शिता अनिवार्य कर दी गई है।
  • अनुशासन केवल दफ्तर तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति को अपने निजी जीवन में भी ऐसा आचरण बनाए रखना होगा, जिससे उसकी छवि और विभाग की गरिमा बनी रहे।
  • सोशल मीडिया पर की गई गतिविधियों को भी अब सेवा आचरण का हिस्सा माना जाएगा और किसी भी तरह की लापरवाही पर कार्रवाई तय है।

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किस विवाद ने बढ़ाई सख्ती?

विदित रहे कि, बीते महीने SDM ओशीन शर्मा की एक सोशल मीडिया पोस्ट अचानक चर्चा में आ गई थी। इस पोस्ट में वह एक जिम से जुड़े प्रोडक्ट का प्रमोशन करती नजर आई थीं। जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि क्या एक प्रशासनिक अधिकारी इस तरह के व्यावसायिक प्रचार का हिस्सा बन सकता है।

सरकार तक पहुंचा मामला

मामला बढ़ते-बढ़ते सरकार तक पहुंच गया और प्रशासनिक स्तर पर भी इसे गंभीरता से लिया गया। बढ़ते विवाद के बीच ओशीन शर्मा ने संबंधित पोस्ट को हटा दिया और अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट अस्थायी रूप से बंद कर दिए।

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सोशल मीडिया पर 9 लाख फॉलोअर्स

उल्लेखनीय है कि उनके फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर करीब 9 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे। जिससे यह मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार ने यह महसूस किया कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच स्पष्ट नियमों की जरूरत है।

माना जा रहा अहम कदम

अब जारी की गई गाइडलाइंस को इसी दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है। ये कदम भविष्य में सरकारी कर्मचारियों की ऑनलाइन गतिविधियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ प्रशासनिक मर्यादा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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