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June 15, 2026

हिमाचल की पंचायतों में नई शुरुआत : आज कमान संभालेंगे प्रधान-उपप्रधान, लेंगे शपथ

हिमाचल की 2950 पंचायतों में आज से नई शुरुआत

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शिमला। हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लगभग साढ़े चार महीने के इंतजार के बाद आज लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह बहाल होने जा रही है। प्रदेश की करीब 2950 पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रधान और उपप्रधान आज पद एवं गोपनीयता की शपथ लेकर अपने कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत करेंगे।

हिमाचल की पंचायतों में नई शुरुआत 

कांगड़ा जिले को छोड़कर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए गए हैं। जहां विधानसभा अध्यक्ष और मंत्रिमंडल के सदस्य नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शपथ दिलाएंगे।

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आज कमान संभालेंगे प्रधान-उपप्रधान

इस शपथ ग्रहण के साथ ही पंचायतों में नई नेतृत्व व्यवस्था सक्रिय हो जाएगी और ग्रामीण विकास से जुड़े अनेक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। लंबे समय से रुके विकास कार्यों के दोबारा शुरू होने की संभावनाओं के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।

चार महीने तक प्रशासकों के भरोसे चली पंचायतें

प्रदेश की पंचायतों में 31 जनवरी के बाद से निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण प्रशासनिक व्यवस्था प्रशासकों के माध्यम से संचालित की जा रही थी। हालांकि नियमित प्रशासनिक कार्य चलते रहे, लेकिन कई विकास योजनाएं, स्थानीय स्तर के निर्णय और जनहित से जुड़े कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाए।

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पंचायतों में विकास की उम्मीदें

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पंचायत प्रतिनिधियों के अभाव का असर महसूस करना पड़ा। कई पंचायतों में विकास योजनाओं के प्रस्ताव लंबित रहे, जबकि कुछ स्थानों पर नई परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में भी देरी हुई। अब निर्वाचित नेतृत्व के कार्यभार संभालने से इन कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

न्यायिक प्रक्रिया के बाद हुए चुनाव

पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद संपन्न हुए। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप 31 मई को पंचायत चुनाव करवाए गए थे। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिससे स्थानीय स्वशासन संस्थाओं का नया कार्यकाल औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा।

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अलग-अलग जिलों में मंत्रियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों में शपथ ग्रहण कार्यक्रमों के लिए मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की ड्यूटी निर्धारित की है।

  • चंबा- विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया
  • ऊना- उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री
  • सोलन- स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल
  • कुल्लू और लाहौल-स्पीति- कृषि मंत्री चंद्र कुमार
  • सिरमौर- उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान
  • किन्नौर- राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी
  • मंडी- पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह
  • बिलासपुर- तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी
  • शिमला- शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर

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मंत्री विक्रमादित्य का नाम लिस्ट से बाहर

आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा को भी संबंधित क्षेत्र में यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को इस कार्यक्रम से अलग रखा गया है। बताया जा रहा है कि उनका पूर्व निर्धारित निजी कार्यक्रम होने के कारण उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।

कांगड़ा में नहीं होगा समारोह

प्रदेश के सबसे बड़े जिले कांगड़ा में शपथ ग्रहण कार्यक्रम अन्य जिलों से अलग रखा गया है। यहां पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रधानों और उपप्रधानों को 18 जून को CM सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं शपथ दिलाएंगे।

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CM दिलाएंगे शपथ

मुख्यमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम के चलते कांगड़ा जिले का समारोह अलग तिथि पर निर्धारित किया गया है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं और बड़ी संख्या में नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी रहने की संभावना है।

कब होगी पहली बैठक?

नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के लिए एक और महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों की पहली आधिकारिक बैठक 27 जून को आयोजित की जाएगी। इसी दिन से प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों का मानदेय भी प्रभावी हो जाएगा।

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पहली बैठक में पंचायतों के वार्ड पंचों को भी औपचारिक रूप से शपथ दिलाई जाएगी। यह प्रक्रिया पंचायतों की पूर्ण कार्यप्रणाली को सक्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विकास कार्यों को मिलेगी नई गति

पंचायत प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। पिछले कई महीनों से लंबित सड़क, पेयजल, स्वच्छता, सामुदायिक भवन, ग्रामीण संपर्क मार्ग और अन्य विकास परियोजनाओं पर अब तेजी से काम शुरू हो सकता है।

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इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के लिए पंचायतों को मिलने वाला बजट भी नियमित रूप से जारी होने की संभावना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का रास्ता साफ होगा।

जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती

नवनिर्वाचित प्रधानों और उपप्रधानों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की होगी। चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करना, विकास कार्यों को प्राथमिकता देना और पंचायत स्तर पर पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करना उनके लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

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