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June 16, 2026

हिमाचल : दुनिया के सबसे ऊंचे डाकघर से खत भेज रहे सैलानी, चार दिन में बिके 98 हजार के स्टांप

स्टांप की लिए दिनभर लगी रहती है पर्यटकों की भीड़

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कुल्लू/लाहौल-स्पीति। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति में इन दिनों पर्यटन गतिविधियां अपने चरम पर हैं। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक स्पीति घाटी का रुख कर रहे हैं।

दुनिया का सबसे ऊंचा डाकघर

स्पीति घाटी में स्थित दुनिया का सबसे ऊंचा डाकघर इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। समुद्र तल से 14,567 फीट की ऊंचाई पर स्थित हिक्किम डाकघर से सैलानी अपने प्रियजनों को खत भेजकर पुरानी यादों को ताजा कर रहे हैं

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चार दिन में बिके 98 हजार के स्टांप

पर्यटन सीजन के बीच इस डाकघर में डाक टिकटों की मांग इतनी बढ़ गई है कि केवल चार दिनों में ही करीब 98 हजार रुपये के स्टांप बिक चुके हैं। सोशल मीडिया के दौर में चिट्ठियों के प्रति लोगों का यह बढ़ता लगाव सभी को हैरान कर रहा है।

पर्यटकों की उमड़ी भीड़

आपको बता दें कि स्पीति आने वाले सैलानी अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और प्रियजनों को पोस्टकार्ड भेजकर यादगार पल संजो रहे हैं। कई पर्यटक तो खुद के नाम भी चिट्ठियां भेजते हैं, ताकि घर लौटने पर उन्हें हिक्किम की मोहर लगी वह चिट्ठी एक विशेष स्मृति के रूप में मिल सके।

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फिर लौट रहा चिट्ठियों का रोमांच

मोबाइल फोन, ईमेल और सोशल मीडिया के युग में जहां संदेश कुछ सेकंड में दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंच जाते हैं। वहीं हिक्किम डाकघर लोगों को पुराने दौर की याद दिला रहा है। यहां आने वाले पर्यटक हाथ से संदेश लिखते हैं, पोस्टकार्ड खरीदते हैं और डाक टिकट लगाकर उन्हें डाक पेटी में डालते हैं।

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डाकघर से खत भेज रहे सैलानी

यही कारण है कि पर्यटन सीजन के दौरान डाकघर के बाहर टिकट और पोस्टकार्ड खरीदने वालों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। पर्यटक इस अनुभव को केवल एक डाक सेवा नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा एक अनूठा सफर मान रहे हैं।

पोस्टकार्ड और टिकटों की रिकॉर्ड बिक्री

हिक्किम डाकघर में इस वर्ष पर्यटकों की बढ़ती संख्या का असर डाक टिकटों और पोस्टकार्ड की बिक्री पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मई और जून महीने के दौरान हजारों पर्यटकों ने यहां पहुंचकर पोस्टकार्ड खरीदे और अपने परिचितों को भेजे।

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बिक्री के बने नए रिकॉर्ड

डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार जून महीने के शुरुआती दिनों में ही हजारों रुपये मूल्य के पोस्टल स्टांप बिक चुके हैं। वहीं मई महीने में भी बिक्री ने नए रिकॉर्ड बनाए। खास बात यह है कि यहां मिलने वाले पोस्टकार्ड पर स्वयं हिक्किम डाकघर की तस्वीर छपी होती है, जिससे यह पर्यटकों के लिए एक यादगार संग्रहणीय वस्तु बन जाता है।

कितने में बिका एक पोस्टकार्ड?

एक पोस्टकार्ड की कीमत 15 रुपये रखी गई है, जबकि उस पर डाक टिकट अलग से लगाई जाती है। कई पर्यटक एक साथ कई पोस्टकार्ड खरीदकर अपने परिवार और मित्रों को भेजते हैं।

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1983 से लगातार दे रहा सेवाएं

हिक्किम डाकघर की स्थापना वर्ष 1983 में की गई थी। पिछले कुछ वर्षों में इसे पर्यटन की दृष्टि से और अधिक आकर्षक बनाया गया। वर्ष 2022 में डाकघर के स्वरूप को विशेष रूप से विकसित किया गया, जिसके बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। आज यह डाकघर स्पीति घाटी की पहचान बन चुका है। यहां पहुंचने वाले अधिकांश पर्यटक अपनी यात्रा की शुरुआत या समापन इस ऐतिहासिक डाकघर के दर्शन के साथ करते हैं।

देर शाम तक खुला रहता है डाकघर

सामान्य तौर पर अधिकांश डाकघर निर्धारित समय पर बंद हो जाते हैं, लेकिन पर्यटन सीजन में हिक्किम डाकघर की तस्वीर कुछ अलग नजर आती है। यहां पर्यटकों की भीड़ इतनी अधिक रहती है कि कई बार डाकघर को देर शाम तक खुला रखना पड़ता है।

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कतारों में खड़े पर्यटक

पर्यटक लगातार पोस्टकार्ड खरीदते हैं और डाक टिकट लेने के लिए कतार में खड़े दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यह छोटा सा डाकघर इन दिनों स्पीति घाटी के सबसे व्यस्त स्थानों में शामिल हो गया है।

कठिन रास्तों से पहुंचती हैं चिट्ठियां

हिक्किम से भेजी गई चिट्ठियों का सफर भी किसी रोमांच से कम नहीं होता। रोजाना डाक कर्मी कठिन पहाड़ी मार्गों से होकर काजा तक डाक पहुंचाते हैं। वहां से चिट्ठियां आगे देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों के लिए रवाना की जाती हैं।

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सर्दियों में बर्फबारी से ढक जाता है इलाका

सर्दियों में जब पूरा इलाका भारी बर्फबारी की चादर में ढक जाता है और तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है, तब भी डाक सेवा जारी रहती है। दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद डाक कर्मी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए लोगों तक संदेश पहुंचाने का काम करते हैं।

ऊंचाई पर पहुंचकर महसूस होता है रोमांच

हिक्किम पहुंचना अपने आप में एक रोमांचकारी अनुभव माना जाता है। अधिक ऊंचाई होने के कारण यहां ऑक्सीजन का स्तर सामान्य क्षेत्रों की तुलना में काफी कम होता है। कई पर्यटकों को तेज़ चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस लेने में परेशानी महसूस होती है।

 

विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि पर्यटक यहां पहुंचने के बाद शरीर को वातावरण के अनुरूप ढलने का समय दें। कुछ लोगों को ऊंचाई के कारण चक्कर, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

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कोमिक गांव पहुंचे पर्यटक 

हिक्किम के आसपास स्थित अन्य पर्यटन स्थल भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। डाकघर देखने के बाद अधिकांश सैलानी पास स्थित कोमिक गांव का रुख करते हैं, जिसे दुनिया के सबसे ऊंचे सड़क संपर्क वाले गांवों में गिना जाता है।

बौद्ध मठ भी बन रहे आकर्षण

इसके अलावा यहां स्थित प्राचीन बौद्ध मठ भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हिक्किम, कोमिक और लांग्जा का पर्यटन सर्किट आज स्पीति यात्रा का सबसे लोकप्रिय हिस्सा माना जा रहा है।

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स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा लाभ

हिक्किम डाकघर की बढ़ती लोकप्रियता का लाभ स्थानीय लोगों को भी मिल रहा है। होम स्टे संचालकों, टैक्सी चालकों, स्थानीय दुकानदारों और हस्तशिल्प विक्रेताओं की आय में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।

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