#विविध

June 16, 2026

सुक्खू सरकार का नया रूल- रिजल्ट अच्छा न रहने पर प्राइमरी और 8वीं में भी फेल होंगे बच्चे

पांचवीं और आठवीं कक्षा में लागू होगी नई व्यवस्था

शेयर करें:

Right To Education

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में अहम बदलाव करते हुए छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से नए नियम लागू किए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने हिमाचल प्रदेश निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमों में संशोधन कर दिया है, जिसके बाद अब पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को भी परीक्षा में असफल होने पर उसी कक्षा में रोका जा सकेगा।

मान्यता प्रक्रिया में भी किया गया बदलाव

दरअसल, राज्य शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह संशोधन शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने और छात्रों के वास्तविक सीखने के स्तर को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। संशोधित नियमों को राजपत्र में प्रकाशित कर लागू कर दिया गया है। सरकार ने स्कूलों को दी जाने वाली अंतरिम मान्यता संबंधी व्यवस्था में भी परिवर्तन किया है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में लुटेरी दुल्हन का खेल खत्म: मामी खोजती थी दूल्हे, 3 महीने में रची तीन शादियां

पहले शिक्षा अधिकारियों द्वारा स्कूलों को तीन वर्ष की अस्थायी मान्यता प्रदान की जाती थी, लेकिन अब इस निर्धारित अवधि को समाप्त कर दिया गया है। भविष्य में स्कूलों की मान्यता की अवधि राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों और अधिसूचनाओं के आधार पर तय की जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे स्कूलों की गुणवत्ता पर अधिक प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी और मानकों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

पांचवीं और आठवीं कक्षा में लागू होगी नई व्यवस्था

संशोधित नियमों के तहत अब प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के अंत में पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों की नियमित वार्षिक परीक्षा आयोजित होगी। यदि कोई छात्र निर्धारित परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे दो माह के भीतर पुनः परीक्षा देने का अवसर मिलेगा।

यह भी पढ़ें- अति गरीब परिवारों के अच्छे दिन शुरू : पक्का मकान बनाएगी सुक्खू सरकार, देगी कई सुविधाएं

यदि छात्र दूसरी परीक्षा में भी उत्तीर्ण नहीं होता, तो उसे अगली कक्षा में प्रोन्नत करने के बजाय उसी कक्षा में रोका जा सकेगा। इससे पहले छात्रों को बिना फेल किए अगली कक्षा में भेजने की व्यवस्था लागू थी।

शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर सरकार का जोर

सरकार का कहना है कि केवल कक्षाएं पास करवाने की बजाय छात्रों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना अधिक आवश्यक है। नई व्यवस्था के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विद्यार्थी अगली कक्षा में जाने से पहले आवश्यक शैक्षणिक दक्षता हासिल करें।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : पत्नी से मिलने गांव आया युवक, दोस्तों के साथ निकला घूमने- खेत में मिली देह

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ेगी तथा पढ़ाई के प्रति गंभीरता भी आएगी। हालांकि कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता और परामर्श की व्यवस्था भी समान रूप से जरूरी होगी।

छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को सीधे फेल नहीं किया जाएगा। पहले उसे सुधार का अवसर देते हुए पुनर्परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाएगा। इसके बावजूद प्रदर्शन संतोषजनक न होने पर ही उसे उसी कक्षा में रखा जाएगा। इस निर्णय को प्रदेश की शिक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में लाखों विद्यार्थियों और स्कूलों पर दिखाई देगा।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख