मंडी। हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध मंडी में हर साल होली का पर्व बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। रंगों, परंपराओं और ऐतिहासिक मान्यताओं से जुड़ा यह उत्सव यहां की खास पहचान है। हालांकि इस बार होली के आयोजन में परंपरा के अनुसार थोड़ा बदलाव किया गया है, जिसने लोगों के बीच अलग ही उत्सुकता पैदा कर दी है।

रंगीन जश्न के साथ मना रहे होली

बता दें कि मंडी में होली का रंगीन जश्न पूरे उत्साह के साथ शुरू हो गया है। शहर के ऐतिहासिक सेरी मंच पर सैकड़ों लोग इकट्ठा होकर एक-दूसरे को गुलाल लगा रहे हैं और होली की शुभकामनाएं दे रहे हैं। हर तरफ रंग, हंसी और संगीत का माहौल बना हुआ है।

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इस बार किया गया थोड़ा बदलाव

मंडी की खास बात यह है कि यहां हर साल होली पूरे प्रदेश से एक दिन पहले मनाई जाती है। लेकिन इस बार 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण परंपरा में थोड़ा बदलाव किया गया है और होली दो दिन पहले ही मनाई जा रही है। इस वजह से लोगों में उत्साह और भी ज्यादा देखने को मिल रहा है।

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स्थानीय लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी इस अनोखे उत्सव को देखने और इसमें शामिल होने पहुंचे हैं। सेरी मंच पर डीजे की धुन पर युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी झूमते नजर आ रहे हैं। लोग रंग लगाकर, गले मिलकर और फोटो खिंचवाकर इस पल को यादगार बना रहे हैं।

सुरक्षा का किया गया है पूरा इंतजाम 

जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि त्योहार शांति के साथ मनाया जा सके। महिलाओं और पुरुषों के डांस के लिए अलग-अलग स्थान तय किए गए हैं और बीच में बैरिकेडिंग लगाई गई है, जिससे भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी में लगी हुई हैं।

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राजा दरबारियों के साथ खेलते थे होली

इतिहासकारों का कहना है कि मंडी की होली की परंपरा बहुत पुरानी है। प्राचीन समय में राजा अपने दरबारियों के साथ यहां होली खेलते थे और घोड़े पर सवार होकर प्रजा के बीच पहुंचते थे। उसी ऐतिहासिक परंपरा को आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जा रहा है। यही कारण है कि मंडी की होली पूरे प्रदेश में खास पहचान रखती है।

ऐसे किया जाता है होली का अंत 

शाम के समय ‘माधोराय की शोभायात्रा’ निकलने के साथ ही इस भव्य होली उत्सव का समापन होगा। इस दौरान अबीर-गुलाल के साथ प्राकृतिक रंगों का विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है। चीड़ और देवदार से प्राप्त पीले रंग ‘पठावा’ से देवताओं का तिलक किया जाता है। धार्मिक आस्था और रंगों के इस अनोखे संगम के साथ मंडी की होली एक अलग ही छाप छोड़ जाती है।

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