शिमला। हिमाचल प्रदेश पुलिस के चर्चित ऑर्केस्ट्रा ‘हार्मनी ऑफ द पाइंस’ के प्रभारी और इंस्पेक्टर विजय कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विदेश यात्रा के लिए कथित तौर पर निजी फर्म से स्पॉन्सरशिप मांगने के मामले में उनके खिलाफ शिमला के ढली पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज की गई है।
2025 में लंदन यात्रा पर गए थे
शिकायत जुन्गा बटालियन में तैनात हेड क्लर्क रमेश कुमार ने दी है। मामला अप्रैल 2025 का बताया जा रहा है, जब विजय कुमार लंदन की यात्रा पर गए थे। उस समय वह जुन्गा बटालियन में पुलिस ऑर्केस्ट्रा के प्रभारी के तौर पर तैनात थे।
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यात्रा के लिए मांगी थी स्पॉन्सरशिप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लंदन यात्रा के लिए विजय कुमार ने एक निजी फर्म से स्पॉन्सरशिप की मांग की थी। इसी व्यवस्था को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए और पुलिस के समक्ष मामला रखा। पुलिस की प्रारंभिक जांच में हालांकि एक अलग तथ्य सामने आया है।
कहां से हुआ था लंदन यात्रा का खर्च?
सूत्रों के अनुसार, विजय कुमार ने स्पॉन्सरशिप की मांग जरूर की थी। मगर लंदन यात्रा पर करीब 1.57 लाख रुपये का खर्च उनके निजी बैंक खाते से हुआ था। जांच में फिलहाल ऐसा सामने नहीं आया है कि इस रकम का भुगतान संबंधित निजी विश्वविद्यालय की ओर से किया गया था। यही बिंदु अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
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स्पॉन्सरशिप की मांग हुई तो खर्च किसने उठाया?
प्रारंभिक जांच में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि विदेश यात्रा के खर्च को लेकर वास्तव में क्या व्यवस्था की गई थी। जिस तरीके से यात्रा के खर्च की बात सामने आई थी, क्या वास्तव में भुगतान उसी व्यवस्था के तहत हुआ या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
किसने किया पैसों का लेन-देन?
पुलिस यात्रा से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि स्पॉन्सरशिप की मांग किस उद्देश्य से की गई थी और इससे जुड़े अन्य लोग या संस्थाएं कौन थीं।
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FIR के बाद अब दस्तावेजों और लेन-देन की जांच
शिकायत और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ढली पुलिस थाना में मामला दर्ज किया गया है। अब पुलिस पूरे प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। हालांकि, FIR दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
जांच में जुटी एजेंसी
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विदेश यात्रा से जुड़ी स्पॉन्सरशिप की मांग और वास्तविक खर्च के बीच क्या संबंध था। दस्तावेजों और बैंक लेन-देन की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
