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September 29, 2026
हिमाचल: JCB से जड़ो समेत उखाड़ ले गए खैर के कई पेड़, वन विभाग ने दो कर्मचारियों को किया सस्पेंड
दोनों कर्मचारियों पर बैठाई विभागीय जांच, ठेकेदारों पर भी दर्ज है एफआईआर
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में कथित अवैध खैर कटान के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। कुटलैहड़ क्षेत्र के डोहक के पास बीहड़ू-डोहक मार्ग पर सामने आए मामले में विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक डिप्टी रेंजर और एक फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया है। इससे पहले मामले में दो नामजद ठेकेदारों के खिलाफ थाना बंगाणा में एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी है।
मामला निर्माणाधीन लाठियाणी-मंदली पुल को जोड़ने वाले बीहड़ू-लाठियाणी मार्ग के आसपास खैर के पेड़ों की कटाई से जुड़ा है। मौके पर निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में खैर के पेड़ जड़ सहित उखड़े मिले। जांच में कुछ पेड़ों को मशीन की मदद से जड़ों समेत बाहर निकालने के निशान भी सामने आए हैं। अब पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से पूरे मामले की पड़ताल कर रहे हैं।
कथित अवैध खैर कटान का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने पहले दो नामजद ठेकेदारों के खिलाफ पुलिस थाना बंगाणा में प्राथमिकी दर्ज करवाई। अब विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए संबंधित डिप्टी रेंजर संजीव कुमार और फॉरेस्ट गार्ड अतिश कुमार को निलंबित किया गया है।
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वन मंडलाधिकारी ऊना विकल्प यादव के अनुसार डोहक गांव के समीप हुए कथित खैर कटान के मामले में दोनों कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। विभागीय कार्रवाई के बाद अब यह भी जांच के दायरे में है कि क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों की निगरानी व्यवस्था कैसी थी और कटान की जानकारी विभाग को समय पर क्यों नहीं मिली।
मामले का सबसे अहम पहलू मौके पर मिले पेड़ों के अवशेष और उन्हें हटाने का तरीका बताया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान करीब 30 खैर के पेड़ जड़ सहित उखड़े हुए पाए गए।
जांच के दौरान कुछ स्थानों पर ऐसे निशान मिले हैं, जिनसे पेड़ों को जेसीबी जैसी मशीन की सहायता से जड़ों समेत उखाड़े जाने की बात सामने आई है। इससे मामला केवल सामान्य कटान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब वन विभाग यह भी जांच रहा है कि पेड़ों को हटाने के लिए किस स्तर की अनुमति थी और मौके पर वास्तव में क्या गतिविधि हुई।
जांच में सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि मौके से काटे या उखाड़े गए खैर के पेड़ों की लकड़ी आखिर गई कहां। वन विभाग अब पेड़ों की संख्या, उनके आकार, कटान अथवा उखाड़े जाने की स्थिति, लकड़ी के परिवहन और उससे जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहा है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि जिस क्षेत्र में खैर कटान की अनुमति दी गई थी, क्या उसी सीमा के भीतर पेड़ों को हटाया गया या उससे बाहर भी कटान हुआ।
बताया जा रहा है कि खैर के पेड़ों को काटने के लिए एक ठेकेदार को टेंडर मिला था। लेकिन आरोप है कि सड़क निर्माण क्षेत्र के आसपास मौजूद वन क्षेत्र में अनुमति से अधिक अथवा अनधिकृत रूप से खैर के पेड़ काटे गए। यही बिंदु अब जांच का मुख्य हिस्सा बन गया है। वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि स्वीकृत क्षेत्र में कितने पेड़ों को हटाने की अनुमति थी और मौके पर कितने पेड़ काटे या जड़ से उखाड़े गए।
मामले की जांच अब केवल मौके पर पेड़ों की गिनती तक सीमित नहीं है। वन विभाग पुलिस के साथ मिलकर यह पता लगाने में जुटा है कि कटान और लकड़ी के परिवहन में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच में ठेकेदारों के अलावा मशीन ऑपरेटर, लकड़ी के परिवहन से जुड़े लोगों और मौके पर निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। विभाग अनुमति से जुड़े दस्तावेजों और लकड़ी के परिवहन संबंधी रिकॉर्ड को भी खंगाल रहा है।
दो वन कर्मचारियों के निलंबन के बाद अब विभागीय जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित क्षेत्र में वन नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कथित अवैध कटान की गतिविधि कितने समय तक चली और विभागीय अमले को इसकी जानकारी कब मिली। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या किसी कर्मचारी की लापरवाही की पुष्टि होती है, तो आगे और कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
फिलहाल वन विभाग ने दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और दो नामजद ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है। मौके पर मिले पेड़ों और लकड़ी से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है। अब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने पेड़ों का कटान नियमों के तहत हुआ और कितने पेड़ों को कथित तौर पर अवैध तरीके से काटा या जड़ों समेत उखाड़ा गया। साथ ही लकड़ी के परिवहन और इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका भी जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है।