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September 29, 2026
हिमाचल के दिग्गज नेता का निधन : पांच बार रहे विधायक, 2 बार संभाला मंत्री पद
दिल का दौरा पड़ने से थमीं सांसें, प्रदेश में शोक
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के दिग्गज नेता का आज सुबह निधन हो गया है। प्रदेश की राजनीति के चर्चित नेताओं में शामिल रहे पूर्व मंत्री और शाहपुर से पांच बार विधायक रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन हो गया है।
मनकोटिया 87 वर्ष के थे। मनकोटिया का राजनीतिक सफर चार दशक से अधिक लंबा रहा और इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने 2022 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था।
शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले मनकोटिया ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1982 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतकर की थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस, जनता दल और बहुजन समाज पार्टी समेत अलग-अलग राजनीतिक मंचों से चुनाव लड़ा। वह शाहपुर से पांच बार विधायक चुने गए।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया को प्रदेश सरकार में दो बार मंत्री बनने का अवसर मिला। वह वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री रहे। 1993 में शाहपुर से चुनाव जीतने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। वर्ष 2003 में भी वह दोबारा विधानसभा पहुंचे और उन्हें पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग की जिम्मेदारी मिली।
हालांकि, उनका राजनीतिक सफर हमेशा सहज नहीं रहा। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ उनके राजनीतिक मतभेद कई बार सार्वजनिक रूप से सामने आए। इसी वजह से वह हिमाचल की राजनीति में एक मुखर और चर्चित नेता के तौर पर पहचाने गए।
वर्ष 2007 में मनकोटिया ने एक ऑडियो सीडी सार्वजनिक की थी, जिसे लेकर प्रदेश की राजनीति में काफी विवाद हुआ। उन्होंने आरोप लगाया था कि रिकॉर्डिंग में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और एक अधिकारी के बीच कथित वित्तीय लेन-देन से संबंधित बातचीत थी। रिकॉर्डिंग को वर्ष 1989 से जुड़ा बताया गया था। इस प्रकरण के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बाद में वीरभद्र सिंह को इस मामले में अदालत से राहत मिली और वह बरी हुए।
मनकोटिया और वीरभद्र सिंह के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय तक चर्चा में रहे। 1990 के दशक से ही दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव देखने को मिला। मनकोटिया ने समय-समय पर तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ अपनी आपत्तियां सार्वजनिक रूप से रखीं। 2017 में भी उन्होंने वीरभद्र सिंह के खिलाफ खुलकर बयान दिए थे।
मनकोटिया ने अलग-अलग दौर में कांग्रेस से दूरी बनाई और दूसरी पार्टियों के साथ भी राजनीतिक सफर आगे बढ़ाया। 2007 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर शाहपुर से चुनाव लड़ा था। बाद में वह फिर कांग्रेस में लौटे और 2012 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। 2017 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया।
अक्टूबर 2022 में मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। उन्हें भाजपा में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। उस समय उनका भाजपा में शामिल होना हिमाचल विधानसभा चुनाव से पहले कांगड़ा की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना गया था।
मनकोटिया का राजनीतिक जीवन मुख्य रूप से शाहपुर और कांगड़ा क्षेत्र की राजनीति के इर्द-गिर्द रहा। पांच बार विधायक और दो बार मंत्री रहने के कारण प्रदेश की राजनीति में उनका एक लंबा सार्वजनिक सफर रहा। अब उनके निधन के बाद पूरे हिमाचल में शोक है।