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September 29, 2026
हिमाचल में मनकोटिया के CD कांड से आया था सियासी भूचाल, राजा वीरभद्र से छिन गई थी कुर्सी
वीरभद्र सिंह और मनकोटिया के बीच लंबे समय तक रहा टकराव
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की राजनीति के चर्चित चेहरों में शामिल रहे पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया का आज सुबह निधन हो गया। उन्होंने 87 वर्ष की उम्र में पैतृक गांव त्यारा में अंतिम सांस ली।
सेना में मेजर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में आए मनकोटिया ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। बेबाक अंदाज और स्पष्ट राजनीतिक रुख के लिए उनकी अलग पहचान रही।
मनकोटिया का राजनीतिक सफर पारंपरिक तरीके से शुरू नहीं हुआ था। उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और पार्टी की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। आगे चलकर वह हिमाचल सरकार में मंत्री भी बने।
हालांकि, कांग्रेस में रहते हुए भी उनका तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा में रहा। दोनों नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे। इसी राजनीतिक खींचतान के दौर में सामने आया एक ऑडियो सीडी प्रकरण हिमाचल की राजनीति के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया।
साल 2007 में मेजर विजय सिंह मनकोटिया द्वारा एक ऑडियो CD सार्वजनिक किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई थी। मनकोटिया ने दावा किया था कि इस रिकॉर्डिंग में तत्कालीन कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और उस समय के एक प्रशासनिक अधिकारी के बीच कथित तौर पर पैसों के लेन-देन से जुड़ी बातचीत थी।
मनकोटिया के मुताबिक, रिकॉर्डिंग वर्ष 1989 से संबंधित थी। CD सामने आने के बाद मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से निकलकर जांच और अदालत तक पहुंच गया। इस प्रकरण का संबंध दाड़लाघाट में सीमेंट प्लांट की एक यूनिट को मंजूरी देने से जुड़े पुराने मामले से जोड़ा गया।
आरोप लगाया गया था कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए बिना प्लांट से संबंधित अनुमति दी गई और इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री पद पर रहे वीरभद्र सिंह ने अपने पद का कथित दुरुपयोग किया। वहीं प्रतिभा सिंह पर भी कथित तौर पर अनुमति दिलाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया गया था।
बाद में इस मामले में वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी। हालांकि, मुकदमे के दौरान मामले की दिशा कई बार बदली और अंततः दोनों को अदालत से राहत मिली।
CD सार्वजनिक होने के बाद हिमाचल में राजनीतिक विवाद और तेज हो गया। जिसके चलते-
साल 2012 में जब वीरभद्र सिंह केंद्र की UPA सरकार में मंत्री थे- उसी दौरान अदालत में आरोप तय होने के बाद उनके केंद्रीय मंत्री पद को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ा। बाद में उन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
उस समय वीरभद्र सिंह के खिलाफ इस्पात मंत्रालय से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोप भी राजनीतिक चर्चा में थे। ऐसे में CD प्रकरण और अन्य आरोपों के बीच उनका केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर होना उस दौर की राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना गया। हालांकि, CD मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ अभियोजन पक्ष के लिए कई चुनौतियां सामने आईं।
इस केस में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ नवंबर 2012 में आया। अदालत में बयान के दौरान मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने CD की उत्पत्ति और उसकी रिकॉर्डिंग को लेकर ऐसी बातें कहीं- जिससे अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ा।
मनकोटिया ने अदालत को बताया था कि उन्हें CD शिमला में कुछ अज्ञात लोगों से मिली थी। उन्होंने यह भी कहा था कि बाद में उन्हें एक अनजान व्यक्ति का फोन आया था। उन्होंने अदालत में यह स्वीकार नहीं किया कि CD उन्होंने स्वयं तैयार की थी।
मामले में एक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि मनकोटिया ने अदालत में रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाजों की पहचान करने से भी इनकार किया। इससे उस CD को लेकर अभियोजन पक्ष के दावों पर सवाल खड़े हुए। अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाही के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चली और अंततः वीरभद्र सिंह तथा प्रतिभा सिंह को इस मामले में बरी कर दिया गया।
मामले में अदालत का फैसला आने के बाद मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने भी न्यायालय के निर्णय को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा था कि अदालत का फैसला सभी के लिए मान्य होना चाहिए।
यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि जिस CD ने हिमाचल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा किया था। उसी मामले की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान प्रमुख गवाह के बयान में बदलाव ने केस की दिशा बदल दी।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया और वीरभद्र सिंह के राजनीतिक संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे। दोनों की राजनीतिक शैली और कई मुद्दों पर उनके विचार अलग रहे। मनकोटिया कई मौकों पर वीरभद्र सिंह की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाते रहे।
CD प्रकरण ने दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी को और स्पष्ट कर दिया। यह विवाद हिमाचल की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। इसके बावजूद मनकोटिया का राजनीतिक जीवन केवल इसी विवाद तक सीमित नहीं था। सेना से राजनीति में आने वाले मनकोटिया ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की और बाद में कांग्रेस के साथ जुड़कर सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का जीवन राजनीति में आने से पहले सेना से जुड़ा था। भारतीय सेना में सेवा देने के बाद उन्होंने सेवानिवृत्ति ली और इसके बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा। सैन्य पृष्ठभूमि का प्रभाव उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व में भी दिखाई देता था। वह सीधे और स्पष्ट अंदाज में अपनी बात रखने के लिए पहचाने जाते थे। यही वजह रही कि हिमाचल की राजनीति में उनका नाम लंबे समय तक प्रमुख नेताओं के बीच लिया जाता रहा।
पहला चुनाव स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर जीतना भी उनके राजनीतिक सफर की खास उपलब्धियों में शामिल रहा। बाद में कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव और बढ़ा तथा उन्हें प्रदेश सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली।
CD प्रकरण की कानूनी प्रक्रिया जिस समय निर्णायक दौर में थी- उसी दौरान हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी हुए। वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला और वीरभद्र सिंह एक बार फिर प्रदेश की सत्ता के केंद्र में लौटे। इसके बाद उन्होंने 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री के रूप में सरकार का नेतृत्व किया। यह उनका मुख्यमंत्री के तौर पर छठा कार्यकाल था। इस तरह जिस दौर में CD मामले को लेकर वीरभद्र सिंह पर कानूनी और राजनीतिक दबाव बना था, उसी के कुछ समय बाद वह हिमाचल की सत्ता में फिर लौटे
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का राजनीतिक जीवन कई अलग-अलग पड़ावों से होकर गुजरा। सेना की सेवा से लेकर निर्दलीय विधायक बनने, कांग्रेस में शामिल होने और मंत्री पद तक पहुंचने के साथ-साथ वह प्रदेश की कई बड़ी राजनीतिक बहसों का हिस्सा रहे।
वीरभद्र सिंह के साथ उनका राजनीतिक संघर्ष और वर्ष 2007 का CD प्रकरण उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे चर्चित घटनाओं में रहा। इस मामले ने हिमाचल की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया और इसकी कानूनी प्रक्रिया भी कई वर्षों तक चली।