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October 1, 2026
हिमाचल हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार को दिया बड़ा झटका, इन अधिसूचनाओं को बताया अवैध, कीं रद्द
भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाएं कीं रद्द
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शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बार फिर प्रदेश की सुक्खू सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ी राज्य सरकार की अधिसूचनाओं को अवैध करार देते हुए पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार बिना किसी ठोस और पारदर्शी लिखित कारण के भूमि अधिग्रहण की समय-सीमा को बार-बार और मनमाने ढंग से नहीं बढ़ा सकती। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने कुलदीप ठाकुर तथा अन्य स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
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यह मामला बिलासपुर जिले की सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले गांवों—उपरी भटेर, बरमाना और खतेर—की उपजाऊ कृषि भूमि और मकानों से जुड़ा है। सरकार ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेल लाइन के निर्माण के लिए 29 मार्च 2023 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के 12 महीनों के भीतर अंतिम घोषणा करना अनिवार्य होता है। लेकिन सरकार की ओर से यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।
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इसके बाद अंतिम घोषणा की समय-सीमा को तीन अलग-अलग मौकों पर बढ़ाया गया। सरकार ने 16 मार्च 2024, 24 मार्च 2025 और 25 मार्च 2026 को समय बढ़ाने से संबंधित अधिसूचनाएं जारी कीं। इन अधिसूचनाओं में देरी के पीछे मुख्य रूप से "अपरिहार्य प्रशासनिक परिस्थितियों" का हवाला दिया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान जब सरकारी रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश किया गया तो देरी के पीछे ठोस और विस्तृत कारण दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। हाईकोर्ट ने इसी बिंदु को महत्वपूर्ण मानते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि कानून के तहत समय-सीमा बढ़ाने का फैसला महज औपचारिकता नहीं है। इसके पीछे मौजूद कारणों को रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज करना आवश्यक है।
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हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण कानून की संबंधित धारा का उल्लेख करते हुए कहा कि समय-सीमा बढ़ाने के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करने के साथ उन्हें अधिसूचित करना और संबंधित विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। अदालत के अनुसार केवल यह कहना कि कुछ अपरिहार्य प्रशासनिक परिस्थितियां पैदा हो गई थीं, अपने आप में पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने सरकार की ओर से समय बढ़ाने के लिए जारी की गई तीनों अधिसूचनाओं को कानून के अनुरूप नहीं माना और उन्हें रद्द कर दिया।
यह मामला केवल रेलवे परियोजना तक सीमित नहीं था, बल्कि उन किसानों के अधिकारों से भी जुड़ा था जिनकी जमीन प्रस्तावित रेलवे लाइन के लिए अधिग्रहित की जानी थी। समय-सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण संबंधित भूमि मालिक अपनी जमीन पर नए निर्माण या अन्य विकास कार्यों को लेकर भी अनिश्चितता में थे। हाईकोर्ट के फैसले से अब इस प्रक्रिया को लेकर सरकार को कानून के अनुरूप आगे कदम उठाने होंगे।
भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन हिमाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना को लेकर बिलासपुर जिले में लंबे समय से भूमि अधिग्रहण सहित विभिन्न प्रक्रियाएं चल रही हैं।
हाईकोर्ट द्वारा अधिसूचनाएं रद्द किए जाने के बाद अब सरकार और संबंधित विभाग को आगे की कार्रवाई कानून के प्रावधानों के अनुसार करनी होगी। मामले में अदालत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रिया में निर्धारित समय-सीमा बढ़ाने के लिए ठोस और रिकॉर्ड पर दर्ज कारण जरूरी हैं। इस फैसले के बाद अब भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामलों में सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।