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October 1, 2026
हिमाचल में सैंकड़ों आउटसोर्स कर्मियों की गई नौकरी! 13 साल की सेवा...क्या फिर ढूंढनी पड़ेगी Job
30 को खत्म हो गया सेवाकाल, भविष्य की सताने लगी चिंता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच अब वर्षों से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। करीब 13 वर्षों तक अलग-अलग विभागों और कार्यालयों में आउटसोर्स आधार पर काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों का सेवाकाल समाप्त होने के बाद उनके भविष्य को लेकर असमंजस गहरा गया है। लंबे समय तक सरकारी तंत्र का हिस्सा रहे इन कर्मचारियों को अब यह चिंता सता रही है कि उनकी नौकरी आगे जारी रहेगी या नहीं।
सबसे अधिक चिंता उन कर्मचारियों में है, जिन्होंने अपनी जवानी के कई वर्ष सरकारी विभागों में सेवाएं देते हुए गुजार दिए। अब सेवाकाल समाप्त होने के बाद यदि उन्हें दोबारा काम नहीं मिलता है तो उनके सामने न केवल रोजगार का संकट खड़ा होगा, बल्कि परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां निभाना भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आउटसोर्स कर्मचारी अब प्रदेश की सुक्खू सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
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हिमाचल प्रदेश के श्रम एवं रोजगार विभाग में करीब 160 आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटर लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये कर्मचारी विभाग के विभिन्न कार्यालयों में डाटा एंट्री सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग करते रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार उन्होंने करीब 13 वर्षों तक लगातार विभाग में काम किया है, लेकिन अब उनका मौजूदा सेवाकाल समाप्त हो गया है।
बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों का वर्तमान सेवाकाल 30 सितंबर को समाप्त हुआ है। इसके बाद 1 अक्तूबर से उन्हें काम जारी रखना है या नहीं, इसे लेकर कर्मचारियों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट लिखित आदेश नहीं मिला है, जिससे यह पता चल सके कि उन्हें आगे विभाग में काम करने की अनुमति है या नहीं।
सेवाकाल समाप्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल कर्मचारियों के सामने यही है कि अगले दिन से वे अपने-अपने कार्यालयों में ड्यूटी दें या नहीं। विभागीय स्तर पर जिला रोजगार अधिकारियों को कर्मचारियों को लेकर मौखिक निर्देश दिए जाने की चर्चा है, लेकिन लिखित आदेश नहीं होने के कारण कर्मचारियों की स्थिति असमंजसपूर्ण बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि 13 वर्षों तक विभाग में काम करने के बाद अचानक भविष्य को लेकर ऐसी स्थिति पैदा होना उनके लिए बेहद चिंताजनक है। यदि उन्हें काम पर आने से रोक दिया जाता है तो उनके पास तत्काल रोजगार का कोई दूसरा विकल्प भी नहीं होगा।
हिमाचल प्रदेश पहले ही बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे समय में लंबे समय से सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त होने की स्थिति ने रोजगार को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। सरकारी नौकरियों के सीमित अवसरों के बीच वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के सामने भी नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
आउटसोर्स कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने एक-दो वर्ष नहीं, बल्कि करीब 13 वर्षों तक विभागों में सेवाएं दी हैं। इस दौरान उन्होंने विभागीय कामकाज का अनुभव हासिल किया और अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। अब सेवाकाल समाप्त होने के बाद यदि उनकी सेवाएं आगे नहीं बढ़ाई जाती हैं तो इतने वर्षों की सेवा के बाद उन्हें फिर से रोजगार की तलाश करनी पड़ेगी।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि यदि सेवा विस्तार नहीं मिला तो उन्हें एक बार फिर नौकरी की तलाश में भटकना पड़ सकता है। उम्र और लंबे अनुभव के इस पड़ाव पर नई नौकरी हासिल करना भी उनके लिए आसान नहीं होगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनके परिवारों की आर्थिक व्यवस्था उनकी आय पर निर्भर है। ऐसे में अचानक रोजगार समाप्त होने से परिवारों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और अन्य आर्थिक जरूरतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
विभागीय स्तर पर कर्मचारियों के सेवाकाल को आगे बढ़ाने से जुड़ी प्रक्रिया चलने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित फाइल उच्च स्तर पर विचाराधीन है। अब कर्मचारियों की नजर सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
फिलहाल आउटसोर्स कर्मचारियों का भविष्य सरकार और विभागीय निर्णय पर टिका हुआ है। सेवा विस्तार मिलता है तो कर्मचारी अपनी सेवाएं आगे भी जारी रख सकेंगे, लेकिन यदि सेवाकाल आगे नहीं बढ़ाया गया तो वर्षों से विभागों में काम कर रहे इन कर्मचारियों के सामने रोजगार का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।