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October 1, 2026
देवभूमि हिमाचल में दो महाशक्तियों आमने-सामने : इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा मिलन
देव जयकारों और धार्मिक वातावरण ने पूरे इलाके को भक्तिमय बना दिया।
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मंडी। देवभूमि हिमाचल के लिए कल का दिन बेहद खास रहा। मंडी जिले के सराज क्षेत्र की च्यौठ कोठी में एक ऐसा धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर देखने को मिली- जिसकी लंबे समय से चर्चा थी।
आपको बता दें कि कुल्लू के अधिष्ठाता देव बालू नाग और सराज क्षेत्र के बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा का ऐतिहासिक महामिलन हुआ। इस अनूठे देव मिलन को देखने के लिए सराज, कुल्लू और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु च्यौठ कोठी पहुंचे।
देव परंपराओं के अनुसार, दोनों देव शक्तियों के आमने-सामने आने का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। देवताओं के आगमन और मिलन के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज, देव जयकारों और धार्मिक वातावरण ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।

इस देव यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि देव बालू नाग पहली बार च्यौठ कोठी पहुंचे। देव बालू नाग अपनी पारंपरिक देव यात्रा के तहत कुल्लू के तादीं गांव स्थित अपनी देव कोठी से सराज क्षेत्र के लिए रवाना हुए थे।
देव बालू नाग के मोहता बलवीर सिंह ठाकुर के अनुसार, बुधवार देर शाम देव बालू नाग का च्यौठ कोठी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। देव परंपरा के अनुरूप आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए गए और इसके बाद देव बालू नाग को देव विष्णु मतलोड़ा की कोठी में विराजमान करवाया गया।
जैसे ही दोनों देव शक्तियों का आमना-सामना हुआ, श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। ढोल-नगाड़ों और देव जयकारों से वातावरण गूंज उठा। लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण को श्रद्धा के साथ देखा और देव परंपरा के इस विशेष आयोजन का हिस्सा बने। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दो क्षेत्रों की पुरानी देव परंपराओं के आपसी संबंध को मजबूत करने वाला अवसर भी रहा।
इस ऐतिहासिक देव मिलन की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि महोत्सव के दौरान हुई थी। देव विष्णु मतलोड़ा और देव बालू नाग के बीच शिवरात्रि के अवसर पर मिलन हुआ था। इसी दौरान दोनों देवताओं की ओर से एक-दूसरे के यहां हारगी यानी मेहमाननवाजी की परंपरा निभाने की इच्छा सामने आई थी।
देव परंपरा में हारगी को सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं माना जाता- बल्कि यह आपसी सम्मान, संबंध और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का माध्यम है। इसी परंपरा के तहत दोनों देवताओं के बीच तय हुआ मिलन कल च्यौठ कोठी में साकार हुआ।
देव मतलोड़ा के गूर भाग सिंह ठाकुर ने बताया कि मंडी शिवरात्रि के दौरान बनी सहमति के बाद देव परंपराओं के अनुरूप यात्रा और मिलन की तैयारियां की गईं। इसके बाद देव बालू नाग अपनी कोठी से सराज की ओर रवाना हुए।

देव बालू नाग की यह यात्रा मंगलवार को तादीं गांव स्थित उनकी देव कोठी से शुरू हुई। देव परंपराओं के अनुसार यात्रा के दौरान विभिन्न धार्मिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। इसके बाद देव बालू नाग बुधवार देर शाम च्यौठ कोठी पहुंचे।
देवता के पहुंचने की सूचना के साथ ही स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया। बड़ी संख्या में लोग देवता के स्वागत और ऐतिहासिक मिलन के साक्षी बनने के लिए च्यौठ कोठी पहुंचे। देवता के आगमन पर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और निर्धारित धार्मिक विधियों के बाद उन्हें देव विष्णु मतलोड़ा की कोठी में विराजमान करवाया गया।
महामिलन को लेकर लोगों में पहले से ही उत्सुकता थी। बुधवार को च्यौठ कोठी में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। सराज के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा कुल्लू और आसपास के इलाकों से भी लोग इस विशेष अवसर पर पहुंचे।
देव परंपरा से जुड़े इस आयोजन में स्थानीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन और देव जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने दोनों देव शक्तियों के मिलन को देखा। लोगों के लिए यह क्षण धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ भी रहा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को क्षेत्र की प्राचीन देव परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से जब अलग-अलग क्षेत्रों के देवता आपसी परंपरा और संबंधों के तहत एक-दूसरे के यहां पहुंचते है- तो इससे देव संस्कृति के पुराने रिश्तों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
देव बालू नाग का यह प्रवास सिर्फ एक दिन के महामिलन तक सीमित नहीं है। देव प्रवास के दौरान रविवार 4 अक्तूबर को बड़ी धाम का आयोजन किया जाएगा। बड़ी धाम में सामूहिक भोज की परंपरा निभाई जाएग- जिसमें स्थानीय लोग और श्रद्धालु शामिल होंगे।
धाम के आयोजन के बाद देव बालू नाग अपनी देव कोठी की ओर वापस प्रस्थान करेंगे। इस तरह देव बालू नाग का पूरा प्रवास करीब पांच दिनों का रहेगा। देव यात्रा, महामिलन और धाम को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह बना हुआ है।
सराज और कुल्लू दोनों ही अपनी विशिष्ट देव परंपराओं के लिए जाने जाते हैं। यहां देवी-देवताओं से जुड़ी परंपराएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है- बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। देवताओं की यात्राएं, मेल-मिलाप, हारगी और सामूहिक भोज जैसी परंपराएं ग्रामीण समाज में आपसी संबंधों को मजबूत करने का माध्यम रही हैं।
च्यौठ कोठी में हुआ यह महामिलन भी इसी व्यापक सांस्कृतिक परंपरा की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां देव बालू नाग पहली बार च्यौठ कोठी पहुंचे। वहीं दूसरी ओर देव विष्णु मतलोड़ा और देव बालू नाग की मुलाकात ने दोनों क्षेत्रों की पुरानी देव परंपराओं को एक साझा मंच प्रदान किया।
देव बालू नाग के मोहता बलवीर सिंह ठाकुर ने कहा कि इस देव प्रवास और महामिलन से सराज और कुल्लू के बीच आस्था तथा सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे। उनके अनुसार, ऐसी परंपराएं क्षेत्र की पुरानी देव मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।