#हिमाचल
September 30, 2026
हिमाचल: अस्पताल में सीने की दर्द से तड़पता रहा युवक, तोड़ा दम; परिजन बोले- समय पर नहीं मिला इलाज
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
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ऊना। हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठने का सिलसिला थम नहीं रहा है। कभी डॉक्टरों की कमी, कभी दवाइयों की किल्लत तो कभी मरीजों को समय पर उपचार न मिलने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। अब ऊना से सामने आया एक मामला अस्पतालों की आपातकालीन व्यवस्था और मरीजों को तत्काल इलाज मिलने पर फिर सवाल खड़े कर रहा है।
क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में बुधवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे एक युवक की इलाज के इंतजार के दौरान मौत हो गई। युवक की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और डॉक्टर तथा नर्सिंग स्टाफ पर उपचार में कथित देरी का आरोप लगाया।
परिजनों के अनुसार, युवक बुधवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत के बाद क्षेत्रीय अस्पताल ऊना पहुंचा था। परिवार का दावा है कि युवक की हालत ठीक नहीं थी और वह लगातार इलाज की मांग कर रहा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि युवक ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को अपनी परेशानी बताई, लेकिन उसे तत्काल उपचार मिलने के बजाय इंतजार करना पड़ा।
हालांकि, अस्पताल में उस समय युवक की चिकित्सकीय स्थिति क्या थी और उसे किस स्तर की आपात चिकित्सा की जरूरत थी, इसका आधिकारिक विवरण अभी सामने नहीं आया है।
परिजनों का आरोप है कि युवक करीब दो घंटे तक उपचार का इंतजार करता रहा। इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह अस्पताल परिसर में गिर पड़ा।
युवक के अचानक गिरने के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। उसे बचाने के प्रयास किए गए, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।
युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने इलाज में कथित देरी को मौत की वजह बताते हुए अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगना शुरू कर दिया।

मौत के बाद परिजन अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए और प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि युवक समय पर उपचार की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसे तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिली।
परिजनों ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर उपचार समय पर शुरू हो जाता तो शायद युवक की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि यदि जांच में किसी कर्मचारी या डॉक्टर की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों से बातचीत कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। युवक की मौत के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा। फिलहाल पुलिस और अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले में विस्तृत जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि युवक की मौत से पहले उसे किस तरह का उपचार मिला और उसे उपचार मिलने में वास्तव में कितनी देरी हुई। परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
युवक की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और इलाज में कथित देरी का उसकी मौत से कोई संबंध था या नहीं, यह जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

ऊना की इस घटना ने एक बार फिर हिमाचल के सरकारी अस्पतालों में आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। गंभीर लक्षणों वाले मरीज अस्पताल पहुंचते हैं तो उनके लिए शुरुआती जांच, तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन और जरूरत के मुताबिक उपचार कितना तेजी से शुरू होता है, यह बेहद महत्वपूर्ण होता है।
• घटना: जून 2026 में, बालीचौकी की रहने वाली 23 वर्षीय मंजू शर्मा (रजनी) की कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद मौत हो गई।
• लापरवाही के आरोप: परिजनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ऑपरेशन के बाद महिला को गंभीर तकलीफ हो रही थी, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने इसे 'ड्रामा' कहकर नजरअंदाज कर दिया।
• कार्रवाई व विरोध: इस घटना के बाद कुल्लू में भारी बवाल हुआ, उग्र भीड़ ने अस्पताल का मुख्य गेट तोड़ दिया और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन भी किया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी महिला डॉक्टर को निलंबित कर दिया और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी विधानसभा सत्र में बयान दिया कि दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
• घटना: मई 2026 में, सोलन जिले के अर्की सिविल अस्पताल में पथरी के ऑपरेशन के बाद एक 44 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
• विवाद की वजह: परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला की अस्पताल में ही मौत हो चुकी थी, लेकिन अपनी नाकामी छिपाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने मृत हालत में ही महिला को शिमला रेफर कर दिया। इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री के एक बयान को लेकर भी सोशल मीडिया पर काफी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
• घटना: सितंबर 2026 में, ज्वालामुखी अस्पताल में एक 22-23 वर्षीय युवती की डिलीवरी के बाद मौत हो गई।
• कमी/लापरवाही: पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रसव के बाद लगातार खून बहने के कारण महिला की हालत बिगड़ रही थी, लेकिन अस्पताल ने समय रहते उसे टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर नहीं किया, जिससे उसकी जान चली गई।