मंडी। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी शिवरात्रि महोत्सव के बाद इन दिनों पूरा क्षेत्र एक अलग ही आध्यात्मिक उल्लास में डूबा है, क्योंकि आराध्य देव कमरूनाग स्वयं अपने भक्तों के घर पहुंचकर उन्हें मेहमाननवाज़ी का अवसर दे रहे हैं। यह वह दुर्लभ परंपरा है, जिसका इंतजार श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं।
वर्ष में केवल एक बार आता है ये क्षण
देव कमरूनाग का मूल स्थान कमरूनाग झील के तट पर माना जाता है, जबकि उनका भंडार कमरूघाटी के गोत गांव में स्थित है। वर्ष में केवल एक बार, शिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने के लिए उनका सूरजपाखा (छड़ी) मंडी नगर आता है। इसी यात्रा के दौरान और महोत्सव के उपरांत देव कमरूनाग अपने श्रद्धालुओं के घर जाकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
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120 से अधिक घरों में दे चुके हैं आशीर्वाद
देव के साथ चल रहे पूर्व गुर नीलमणि के अनुसार 6 फरवरी को देव कमरूनाग अपने भंडार से मंडी के लिए रवाना हुए थे। अब तक वे 120 से अधिक घरों में पहुंच चुके हैं और आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में भक्तों ने उन्हें निमंत्रण दे रखा है। प्रतिदिन अधिकतम पांच घरों में ही देव का आगमन होता है, ताकि परंपरा की मर्यादा और विधि-विधान पूरी श्रद्धा से निभाई जा सके।
भक्तों के लिए क्यों है खास यह अवसर
भक्तों के लिए यह सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और आत्मीयता का उत्सव है। मंडी के व्यवसायी राजेंद्र वशिष्टा और उनकी पत्नी मोनिका वशिष्टा बताते हैं कि जब से उन्होंने यहां अपना कारोबार शुरू किया, तभी से वे हर वर्ष देव कमरूनाग को आमंत्रित करते हैं। पिछले 12 वर्षों से उन्हें यह सौभाग्य निरंतर मिल रहा है। उनके अनुसार, वर्ष में यही एक अवसर होता है जब वे अपने आराध्य की सेवा कर पाते हैं।
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पैदल पूरी होती है देव यात्रा
इस यात्रा की विशेषता यह भी है कि देव कमरूनाग का सूरजपाखा पूरी तरह पैदल ही चलता है। किसी वाहन का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे परंपरा की पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे। मान्यता है कि 14 मार्च, संक्रांति तक यह यात्रा पूर्ण हो जाएगी और देव पुनः अपने भंडार में विराजमान हो जाएंगे।
