मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला परिषद चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति को बड़ा संदेश दिया है। इस बार मतदाताओं ने कई बड़े राजनीतिक परिवारों के उत्तराधिकारियों को नकारते हुए साफ कर दिया कि चुनाव जीतने के लिए केवल राजनीतिक विरासत काफी नहीं है। दूसरी ओर भाजपा ने जिला परिषद सदन में एकतरफा बढ़त बनाते हुए 36 में से 25 सीटों पर जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम कर लिया।
जनता ने वंशवाद को दिया झटका
इस चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के परिवार को लगा। उनकी बेटी और जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंपा ठाकुर को कोटली वार्ड से भाजपा समर्थित उम्मीदवार हेमलता के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।
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चंपा ठाकुर लगातार चार बार जिला परिषद सदस्य रह चुकी थीं और एक बार जिला परिषद अध्यक्ष का पद भी संभाल चुकी थीं। लेकिन इस बार जनता ने उनकी पांचवीं जीत की उम्मीदों पर विराम लगा दिया।
महेंद्र सिंह की बेटी भी नहीं बचा सकीं सियासी विरासत
पूर्व भाजपा मंत्री महेंद्र सिंह के परिवार को भी झटका लगा। उनकी बेटी वंदना गुलेरिया टिहरा वार्ड से चुनाव हार गईं। यह मुकाबला बेहद करीबी रहा, लेकिन अंत में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष चेतराम ठाकुर के बेटे तरुण ठाकुर भी चुनावी मैदान में सफलता हासिल नहीं कर सके। नतीजों ने यह साफ कर दिया कि इस बार मतदाताओं ने नाम और पहचान से ज्यादा स्थानीय कामकाज और जनसंपर्क को महत्व दिया।
भाजपा का जिला परिषद पर कब्जा
36 सदस्यीय जिला परिषद सदन में भाजपा ने 25 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस केवल 4 सीटों पर सिमट गई। भाजपा के तीन असंतुष्ट उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की, जबकि दो सीटें माकपा और दो निर्दलीयों के खाते में गईं। यह परिणाम मंडी जिले में भाजपा की मजबूत संगठनात्मक पकड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते प्रभाव का संकेत माना जा रहा है।
कंगना रनौत के गृह वार्ड में भाजपा को झटका
चुनाव में एक बड़ा उलटफेर भांबला वार्ड में भी देखने को मिला, जो मंडी सांसद कंगना रनौत का गृह वार्ड माना जाता है। यहां भाजपा की आधिकारिक उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा की असंतुष्ट उम्मीदवार अभिलाषा ठाकुर ने जीत दर्ज की। यह परिणाम भाजपा के लिए भी आत्ममंथन का विषय माना जा रहा है।
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माकपा के कुशाल भारद्वाज ने बचाई पुरानों की साख
भड्याड़ा वार्ड से माकपा नेता कुशाल भारद्वाज ने शानदार जीत दर्ज की। नए जिला परिषद सदन में वे इकलौते ऐसे पूर्व सदस्य हैं जिन्हें जनता ने दोबारा मौका दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी जीत जमीनी संघर्ष और लगातार जनता के बीच सक्रिय रहने का परिणाम है।
नतीजों ने दिया बड़ा राजनीतिक संकेत
मंडी जिला परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण मतदाता अब राजनीतिक विरासत और बड़े नामों से प्रभावित होने के बजाय स्थानीय नेतृत्व और कामकाज के आधार पर फैसला लेने लगे हैं। भाजपा की बड़ी जीत और कई दिग्गजों के परिजनों की हार को आने वाले राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
