#राजनीति
July 16, 2026
"मैंने 700 बेरोजगारों को दिलाई नौकरी" अपने दावों में घिरे मंत्री हर्षवर्धन, BJP ने मांगी जांच
मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने दी सफाई; भाजपा ने जांच की उठाई मांग
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान का 700 लोगों को रोजगार दिलाने संबंधी बयान इन दिनों राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। बयान के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी भाजपा ने सरकार को निशाने पर लेते हुए इसे गंभीर मामला बताया है।
भाजपा का आरोप है कि यदि किसी मंत्री के प्रभाव से इतनी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, उद्योग मंत्री ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रत्येक नियुक्ति आउटसोर्स व्यवस्था के तहत तय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार हुई है।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आउटसोर्स भर्ती की प्रक्रिया नियमित सरकारी भर्तियों से अलग होती है। इसमें इंटरव्यू जैसी व्यवस्था नहीं होती और संबंधित एजेंसियां निर्धारित मानकों के अनुरूप नियुक्तियां करती हैं।
उन्होंने कहा कि यह प्रणाली वर्तमान सरकार की नहीं, बल्कि पूर्व भाजपा सरकार के समय से लागू है और उस दौरान भी विभिन्न विभागों में इसी माध्यम से लोगों को रोजगार मिलता रहा है।
मंत्री ने कहा कि यदि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए हैं तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता। उनका कहना था कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि का कर्तव्य अपने क्षेत्र के लोगों के हितों के लिए काम करना होता है। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि पिछली सरकार के मंत्री और विधायक अपने क्षेत्रों के युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध नहीं करा सके, तो यह उनकी कार्यशैली की कमी रही होगी।
उद्योग मंत्री ने बताया कि उनका विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक रूप से काफी दुर्गम और पिछड़ा है, जहां लंबे समय से कई विभागों में पद रिक्त पड़े थे। इन्हीं आवश्यकताओं को देखते हुए आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से नियुक्तियां की गईं।
उन्होंने जानकारी दी कि क्षेत्र के स्कूलों में करीब 85 लोगों को रोजगार मिला, जबकि जल शक्ति विभाग में लगभग 67 युवाओं को आउटसोर्स के जरिए नियुक्त किया गया। इसके अलावा आयुष, योगा इंस्ट्रक्टर और अन्य विभागों में भी कई युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।
उन्होंने कहा कि इन सभी पदों को सरकार की स्वीकृति और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार भरा गया है। इसलिए नियुक्तियों को लेकर किसी भी प्रकार की अनियमितता का आरोप निराधार है।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि अपने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलना उनके लिए खुशी और संतोष का विषय है। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि बनाकर विधानसभा भेजा है, इसलिए क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में भी आउटसोर्स के माध्यम से पद सृजित होते हैं तो वह पात्र युवाओं को उनका लाभ दिलाने का प्रयास करते रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र के लोगों के हित में काम करने के लिए आलोचना नहीं, बल्कि प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उनके अनुसार भाजपा को इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय यह देखना चाहिए कि दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार मिलने से उन्हें आर्थिक मजबूती मिली है।
उधर, भाजपा ने मंत्री के बयान को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है। पूर्व उद्योग मंत्री एवं भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने कहा कि यदि कोई मंत्री सार्वजनिक रूप से यह दावा करता है कि उसने अपने क्षेत्र के 700 लोगों को रोजगार दिलाया है, तो यह अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और समान अवसर सर्वोपरि होने चाहिए।
बिक्रम ठाकुर ने मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित नियुक्तियां किस प्रक्रिया के तहत हुईं और उनमें नियमों का पूरी तरह पालन किया गया या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
फिलहाल उद्योग मंत्री अपने बयान पर कायम हैं और उनका कहना है कि सभी नियुक्तियां नियमों के तहत आउटसोर्स व्यवस्था से हुई हैं। वहीं भाजपा इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।