#अपराध

July 16, 2026

हिमाचल की इस जेल में नशे का खेल, कैदी के पास मिला चिट्टा, कैप्सूल- मोबाइल सहित बहुत कुछ

अंडर ट्रायल कैदी से चिट्टा, नशीली गोलियां, मोबाइल सहित अन्य सामान बरामद

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Himachal Hamirpur Jail

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में नशे का बढ़ता कारोबार अब केवल शहरों और गांवों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी पहुंच जेलों की ऊंची दीवारों के भीतर तक होने के संकेत मिलने लगे हैं। हमीरपुर जिला से सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां जिला कारागार में बंद एक अंडर ट्रायल कैदी के पास से चिट्टा, संदिग्ध नशीली गोलियां, कैप्सूल, मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित सामान बरामद हुआ है। घटना के सामने आने के बाद जेल परिसर में हड़कंप मच गया और मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी।

जेल वार्डन की मुस्तैदी से बेनकाब हुआ खेल

जानकारी के अनुसार जिला कारागार हमीरपुर में ड्यूटी पर तैनात एक वार्डन की नजर एक अंडर ट्रायल कैदी हीरा मुखिया की संदिग्ध गतिविधियों पर पड़ी। कैदी जेल परिसर के उस हिस्से में जाता दिखाई दिया जहां उसके जाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं था। जब उससे पूछताछ की गई तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इस पर जेल कर्मियों को शक हुआ और उसकी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान जो सामान बरामद हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया।

 

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अंडरवियर और जेबों में छिपा रखा था नशे का जखीरा

जेल प्रशासन द्वारा की गई जांच में हीरा मुखिया के लोअर की दाहिनी जेब से एक लिफाफा मिला, जिसमें चाय की पत्ती पैक थी। इसके बाद जब उसकी गहनता से जांच की गई, तो उसके अंडरवियर के भीतर से एक और बड़ा पैकेट बरामद हुआ। पकड़े जाने के डर से आरोपी कैदी ने चालाकी दिखाते हुए वह पैकेट वहां मौजूद एक अन्य कैदी ताज मोहम्मद की तरफ फेंक दिया। लेकिन मौके पर मुस्तैद दूसरे वार्डन शिशुपाल ने फुर्ती दिखाते हुए उस पैकेट को अपने कब्जे में ले लिया। जब जेल स्टाफ ने इस संदिग्ध पैकेट को काटकर खोला, तो उसके भीतर का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए।

कैदी के पास क्या क्या मिला

पैकेट से कई प्रकार की संदिग्ध और प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद हुईं। इनमें नशीले पदार्थों के अलावा मोबाइल फोन, डाटा केबल, लाइटर, तंबाकू उत्पाद, नकदी और अन्य सामान शामिल बताया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह रही कि बरामद सामग्री में एक ऐसा पदार्थ भी मिला जो प्रथम दृष्टया चिट्टा प्रतीत हुआ। इसके अलावा बड़ी संख्या में कैप्सूल और गोलियां भी बरामद हुईं, जिनकी जांच की जा रही है।

 

 

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जेल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी मात्रा में प्रतिबंधित सामान जेल के भीतर पहुंचा कैसे? जेलों को अपराध और अवैध गतिविधियों से दूर रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है, लेकिन इस मामले ने सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह सामान जेल के अंदर किस माध्यम से पहुंचा और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है।

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नशे का नेटवर्क जेल तक पहुंचने की आशंका

पुलिस इस मामले को केवल एक कैदी तक सीमित नहीं मान रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे नशे की सप्लाई से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या जेल के भीतर अन्य कैदियों तक भी नशीले पदार्थ पहुंचाए जा रहे थे। यदि जांच में किसी संगठित गिरोह या बाहरी नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मादक पदार्थों से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। बरामद नशीले पदार्थों और अन्य सामान को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सकता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और यह पता लगाया जाएगा कि जेल के भीतर नशे और प्रतिबंधित सामान की सप्लाई का स्रोत क्या है।

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चिंता का विषय बना जेलों में नशे की दस्तक

हमीरपुर जेल में सामने आया यह मामला प्रदेश में बढ़ते नशे के खतरे की एक और गंभीर तस्वीर पेश करता है। यदि नशे का कारोबार जेलों तक पहुंच चुका है, तो यह केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं बल्कि सुधार गृहों की मूल अवधारणा के लिए भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग भी जोर पकड़ सकती है।

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