शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में 25 बार बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। अकेले मंडी जिले में ही 15 स्थानों पर बादल फटे हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने राज्य में जान-माल का भारी नुकसान किया है। 14 लोगों की मौत, 8 लोग बाढ़ में बह कर मरे, और 34 लोग अब भी लापता हैं।
बार-बार हो रही इन घटनाओं को लेकर अब केंद्र सरकार गंभीर हो गई है और गृह मंत्री अमित शाह के आदेश पर विशेषज्ञों की एक केंद्रीय टीम अध्ययन के लिए हिमाचल पहुंच गई है।
क्या करेगी केंद्रीय टीम?
सीएसआईआर रुड़की के चीफ साइंटिस्ट कर्नल केपी सिंह की अध्यक्षता में पहुंची टीम आज शिमला में हिमाचल सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। इस दौरान राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक डीसी राणा बादल फटने और उससे हुई तबाही पर प्रेजेंटेशन देंगे।
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टीम 25 और 26 जुलाई को उन इलाकों का दौरा करेगी जहां हाल ही में बादल फटे हैं। टीम ग्राउंड से आंकड़े जुटाकर ये पता लगाने की कोशिश करेगी कि आखिर हिमाचल में इस तरह की घटनाएं इतनी बार क्यों हो रही हैं। लौटकर ये टीम 5 दिन के भीतर गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपेगी।
केंद्रीय टीम में शामिल विशेषज्ञ
- कर्नल केपी सिंह – मुख्य वैज्ञानिक, CSIR रुड़की
- डॉ. एसके नेगी – सीनियर साइंटिस्ट, CSIR रुड़की
- अरुण कुमार – रिटायर्ड जियोलॉजिस्ट, मणिपुर यूनिवर्सिटी
- सुष्मिता – रिसर्चर, IITM पुणे
- डॉ. नीलिमा – सिविल इंजीनियर, IIT इंदौर
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कैसे होता है बादल फटना?
बादल फटना एक खतरनाक प्राकृतिक घटना है जिसमें सीमित क्षेत्र में 100 मिमी से ज्यादा बारिश चंद मिनटों में होती है। जब गर्म हवा बारिश के भारी कणों को ऊपर उठाती है और फिर अचानक हवा का बहाव रुक जाता है, तो संचित नमी एक साथ गिरती है – यही होता है बादल फटना। इसके कारण बाढ़, लैंडस्लाइड और संपत्ति का भारी नुकसान होता है।
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CM के आग्रह पर पहुंची टीम
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाल ही में दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययन की मांग की थी। उसके बाद ही यह उच्चस्तरीय टीम भेजी गई है। अब उम्मीद की जा रही है कि यह टीम बादल फटने के वास्तविक कारणों की पहचान करके प्रदेश को सटीक समाधान और नीतिगत सुझाव देगी।
