#उपलब्धि
June 14, 2026
हिमाचल : दो साल में सिपाही से लेफ्टिनेंट बना अर्पित, माता-पिता ने कंधों पर सजाए स्टार
अर्पित के पिता आबकारी विभाग में सेवाएं दे रहे हैं
शेयर करें:

ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के होनहार बेटे ने बड़ी सफलता हासिल की है। गगरेट उपमंडल के गांव नकडोह के युवा अर्पित जसवाल ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।
उनकी इस उपलब्धि से गांव और आसपास के इलाकों में खुशी की लहर है तथा लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान अर्पित जसवाल को भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्रदान किया गया।
माता-पिता ने कंधे पर सजाए स्टार
इस विशेष अवसर पर उनके माता-पिता मल्कियत जसवाल और सुषमा देवी भी मौजूद रहे। बेटे के कंधों पर अधिकारी के स्टार सजाते समय माता-पिता की आंखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी। परिवार के लिए यह पल जीवन की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक बन गया।
अर्पित के पिता मल्कियत जसवाल आबकारी विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनकी माता सुषमा देवी गृहिणी हैं। अर्पित ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट डीआर पब्लिक स्कूल गगरेट से पूरी की और इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए नगरोटा कॉलेज का रुख किया। पढ़ाई के साथ-साथ उनके मन में देश सेवा का जज्बा भी लगातार मजबूत होता रहा।
देश की वर्दी पहनने के अपने सपने को साकार करने के लिए अर्पित ने वर्ष 2020 में भारतीय सेना में सिपाही के रूप में भर्ती होकर सैन्य जीवन की शुरुआत की। सेना में रहते हुए उन्होंने कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के बल पर खुद को लगातार बेहतर बनाया। उनकी मेहनत रंग लाई और कुछ ही वर्षों में उन्हें भारतीय सैन्य अकादमी के लिए चयनित होने का अवसर मिला।
देहरादून में कठोर सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अर्पित ने अधिकारी बनने का अपना सपना साकार कर लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने हर चुनौती का सामना दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ किया और अंततः भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया।
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उनकी नियुक्ति सेना की प्रतिष्ठित बॉम्बे इंजीनियर्स रेजिमेंट में की गई है। अवकाश समाप्त होने के बाद वह अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में अपनी पहली तैनाती के लिए रवाना होंगे।
अपनी सफलता पर अर्पित ने इसका श्रेय अपने माता-पिता और स्वर्गीय दादा बख्शी राम को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार की प्रेरणा, विश्वास और आशीर्वाद ने उन्हें हर कठिन परिस्थिति में आगे बढ़ने की शक्ति दी।
अर्पित जसवाल की यह उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है। उनका सफर यह संदेश देता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे पाने का संकल्प मजबूत हो, तो साधारण शुरुआत भी असाधारण सफलता में बदल सकती है। भारतीय सेना में सिपाही से लेफ्टिनेंट बनने तक की उनकी यात्रा संघर्ष, समर्पण और सफलता की प्रेरक कहानी है।