#अपराध
June 14, 2026
हिमाचल में युवक ने फर्जी सर्टिफिकेट से हथिया ली सरकारी नौकरी, विजिलेंस जांच में खुला बड़ा खेल
शख्स ने फर्जी सर्टिफिकेट से गरीब उम्मीदवार का भी छीन लिया हक
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी भर्ती प्रक्रिया और प्रमाण पत्रों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिलासपुर जिले में एक युवक ने कथित तौर पर फर्जी ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली। हैरानी की बात यह है कि इस प्रमाण पत्र की मदद से उसने टीजीटी शिक्षक के पद पर नियुक्ति भी प्राप्त कर ली, जबकि वह इस श्रेणी का वास्तविक पात्र नहीं था। मामले का खुलासा होने के बाद अब आरोपी के खिलाफ पुलिस ने विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने गुप्त रूप से इसकी जांच शुरू की। जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे पता चला कि नौकरी हासिल करने के लिए आवेदन करते समय आय संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कम आय दिखाकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का लाभ लिया गया, जबकि वास्तविक स्थिति कुछ और थी। विजिलेंस की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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इस पूरे घटनाक्रम ने उन वास्तविक जरूरतमंद और गरीब अभ्यर्थियों के साथ हुए अन्याय को भी उजागर कर दिया है, जो ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और अन्य सुविधाओं के पात्र होते हैं। एक फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए न केवल सरकारी नौकरी हासिल की गई, बल्कि उस सीट पर किसी वास्तविक हकदार उम्मीदवार का अवसर भी छिन गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामले आरक्षण और सामाजिक न्याय की व्यवस्था को कमजोर करते हैं तथा पात्र उम्मीदवारों के अधिकारों पर सीधा प्रहार करते हैं।
मामले में आरोपी का पक्ष भी सामने आया है। उसका कहना है कि उसने नौकरी ज्वाइन करने के करीब 15 दिन बाद ही पद से इस्तीफा दे दिया था। आरोपी के अनुसार जांच के दौरान जब उसके पिता की आय को भी कुल पारिवारिक आय में शामिल किया गया तो निर्धारित सीमा से अधिक आय होने की बात सामने आई। हालांकि, जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि आवेदन के समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेज और दी गई जानकारी कितनी सही थी और क्या जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया था।
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पुलिस उपाधीक्षक विशाल वर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि विजिलेंस जांच रिपोर्ट के आधार पर भराड़ी थाना में केस दर्ज किया गया है। मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी भर्तियों में प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाण पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते जांच नहीं होती तो यह मामला कभी सामने नहीं आता और एक अपात्र व्यक्ति सरकारी नौकरी का लाभ उठाता रहता। फिलहाल पुलिस और विजिलेंस एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं तथा यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दस्तावेजों में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।