सोलन। हिमाचल प्रदेश में सरकारी काम करवाने के बदले रिश्वत मांगने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कभी जमीन से जुड़े दस्तावेजों के नाम पर तो कभी सरकारी प्रक्रिया पूरी करने के बदले आम लोगों से पैसों की मांग किए जाने के आरोप लग रहे हैं। अब ऐसा ही एक मामला सोलन जिले से सामने आया है, जहां जमीन का बंटवारा यानी तकसीम करने की प्रक्रिया पूरी करने के बदले महज 1500 रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में बंदोबस्त विभाग के एक पटवारी के खिलाफ विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की है।
मामले में पटवारी अंकुर पर शिकायतकर्ता विकास कंवर से रिश्वत मांगने का आरोप है। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के मुताबिक, कथित तौर पर रिश्वत की रकम नकद लेने के बजाय गूगल पे के माध्यम से भेजने को कहा गया था। इसके लिए पटवारी ने शिकायतकर्ता को अपना मोबाइल नंबर भी दिया। शिकायतकर्ता ने रिश्वत मांगने से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी विजिलेंस को सौंपी है।
जमीन की तकसीम के बदले मांगे 1500 रुपये
शिकायतकर्ता विकास कंवर के अनुसार, उसे अपनी जमीन की तकसीम की प्रक्रिया पूरी करवानी थी। आरोप है कि बंदोबस्त विभाग में तैनात पटवारी अंकुर ने इस काम को आगे बढ़ाने के बदले उससे 1500 रुपये की मांग की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पटवारी ने पैसे भेजने के लिए अपना मोबाइल नंबर दिया और गूगल पे के जरिए भुगतान करने को कहा। सरकारी दफ्तर में जमीन से जुड़ा काम करवाने पहुंचे व्यक्ति से रिश्वत मांगने का यह आरोप एक बार फिर व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है।
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ऑडियो रिकॉर्डिंग लेकर विजिलेंस पहुंचा शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता ने कथित रिश्वत मांगने से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों को सौंपी है। शिकायत और उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर विजिलेंस ने मामले में कार्रवाई शुरू की।
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3 नवंबर को सोलन स्थित विजिलेंस थाने में पटवारी अंकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। फिलहाल मामले की जांच जारी है। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों और ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित अन्य तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
रिश्वत के मामलों में नहीं होगी ढिलाई: DGP
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने स्पष्ट किया है कि रिश्वत की रकम छोटी हो या बड़ी, भ्रष्टाचार के मामलों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत मांगता है तो इसकी सूचना तुरंत विजिलेंस को दें। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में जनता का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। शिकायत मिलने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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सरकारी काम के लिए रिश्वत मांगने पर उठे सवाल
सोलन का यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि आम नागरिकों को अपने वैध सरकारी काम करवाने के लिए किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। जमीन की तकसीम जैसी राजस्व प्रक्रिया लोगों के लिए पहले ही समय और दस्तावेजों से जुड़ी चुनौती होती है। ऐसे में रिश्वत मांगने के आरोप व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को प्रभावित करते हैं। हालांकि, पटवारी के खिलाफ अभी एफआईआर दर्ज हुई है और आरोपों की जांच जारी है। जांच के नतीजों के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।
