बिलासपुर। क्या आप भी पुरानी गाड़ी खरीदने का मन बना रहे हैंघ् अगर हां तो बिलासपुर में हुई इस सनसनीखेज वारदात को जरूर पढ़ लें, वरना आपकी मेहनत की कमाई भी जालसाजों की भेंट चढ़ सकती है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में ठगी का एक ऐसा शातिराना मामला सामने आया है, जिसने पुरानी गाड़ी खरीदने वालों के होश उड़ा दिए हैं।
हिमाचल के बिलासपुर जिला में एक व्यक्ति को सेकेंड हैंड के नाम पर न केवल चोरी की गाड़ी थमा दी गई, बल्कि जाली दस्तावेजों के दम पर उससे 14 लाख रुपये भी वसूल लिए गए। शातिर ने इस कदर जाल बुना था कि बैंक से लोन भी पास हो गया और पीड़ित को भनक तक नहीं लगी कि वह जिस गाड़ी को अपनी शान समझ रहा है, वह असल में जुर्म की दुनिया से आई है।
गाड़ी का सपना ऐसे हुआ चकनाचूर
ठगी की यह कहानी दिसंबर 2025 में शुरू हुई, जब घुमारवीं के अशोक कुमार की मुलाकात खुद को गाड़ियों का बड़ा कारोबारी बताने वाले अराफात हुसैन से हुई। आरोपी ने काले रंग की स्कार्पियो एचपी 24ई-5472 का सौदा 14 लाख रुपये में तय किया। शातिर अपराधी ने अशोक को अपने विश्वास में इस कदर ले लिया कि उसने बिना ज्यादा पड़ताल किए 28 दिसंबर को 3 लाख रुपये नकद एडवांस थमा दिए। उसे लग रहा था कि उसे एक बेहतरीन डील मिली है, लेकिन उसे क्या पता था कि यह डील उसके बैंक बैलेंस को पूरी तरह खाली करने वाली है।
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बैंक से लोन लेकर चुकाई रकम
सौदे के तहत खरीदार ने पहले तीन लाख रुपये नकद दिए। इसके बाद बाकी रकम जुटाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक की एम्स शाखा से वाहन ऋण लिया गया। आरोपी के कहने पर करीब 10.50 लाख रुपये उसके एचडीएफसी बैंक खाते में जमा करवा दिए गए। इस तरह पूरी रकम चुकाने के बाद गाड़ी खरीदार को सौंप दी गई। वहीं पैसे मिलने के बाद आरोपी रफूचक्कर हो गया। ठगी का यह खेल इतना सफाई से खेला गया था कि शुरुआती कागजी कार्रवाई में कहीं कोई कमी नजर नहीं आई।
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कैसे हुआ मामले का खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ जब फरवरी के अंत में शिमला पुलिस की जांच में यह वाहन संदिग्ध पाया गया। जांच आगे बढ़ने पर सामने आया कि यह गाड़ी मूल रूप से चोरी की है और इसकी रिपोर्ट पंजाब के अमृतसर में दर्ज है। इतना ही नहीं, गाड़ी के इंजन और चेसिस नंबर भी फर्जी निकले, जबकि प्रस्तुत रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) पूरी तरह नकली पाया गया। पीड़ित ने आरोप लगाया कि आरोपी ने पूरी योजना के तहत उसे झांसे में लिया और फर्जी दस्तावेजों के सहारे लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
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बिलासपुर में पहले भी फर्जीवाड़ा हुआ है उजागर
इस मामले ने एक बार फिर बिलासपुर में पहले उजागर हो चुके वाहन फर्जीवाड़ों की याद ताजा कर दी है। इससे पहले भी पंजीकरण और लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) शाखा में चोरी की गाड़ियों के नंबर और रजिस्ट्रेशन से जुड़े घोटाले सामने आ चुके हैं, जिनमें बाहरी राज्यों की पुलिस भी कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में संगठित गिरोह की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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आम लोगों के लिए चेतावनी
अगर आप भी सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह मामला आपके लिए एक सबक है। किसी भी वाहन को खरीदने से पहले उसके दस्तावेजों की पूरी तरह जांच कराएं, इंजन और चेसिस नंबर का मिलान करें और संभव हो तो संबंधित विभाग या पुलिस से सत्यापन जरूर कराएं। थोड़ी सी लापरवाही आपको भारी आर्थिक नुकसान में डाल सकती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सस्ती डील या जल्दबाजी में वाहन खरीदने से बचें और हर स्तर पर जांच.पड़ताल को प्राथमिकता दें।
