#अपराध
April 19, 2026
हिमाचल की स्मार्ट सिटी में बड़ा घोटाला- सोलर प्रोजेक्ट के पैसे से अफसर के घर तक बनी सड़क
वन मंजूरी के बिना निर्माण, पर्यावरण नियमों की अनदेखी
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कामकाज पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक रिटायर्ड अफसर के निर्माणाधीन मकान तक पहुंचने के लिए बनाई गई सड़क से जुड़ा है, जो कि असल प्रोजेक्ट प्लान का हिस्सा ही नहीं थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला जिला कांगडा के धर्मशाला का है। यहां पर स्मार्ट सिटी के तहत चल रहे सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट का कुल बजट करीब साढ़े चार करोड़ रुपये है। आरोप ये है कि इसी प्रोजेक्ट के पैसों में से लगभग 48 लाख रुपये निकालकर इस सड़क का निर्माण कर दिया गया।
हैरानी की बात ये है कि जिस सड़क को बनाया गया, उसकी मंजूरी पहले से नहीं थी और न ही ये किसी आधिकारिक योजना में शामिल थी। अधिकारियों का कहना है कि यह सड़क स्थानीय ग्रामीणों की मांग पर बनाई गई, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बता रही है।
यह सड़क सीधे उस रिटायर्ड अफसर के निजी परिसर तक जाती है, जिससे साफ लगता है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा उसी व्यक्ति को मिल रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी पैसे का इस्तेमाल किसी निजी लाभ के लिए किया गया।
मामले में पर्यावरण नियमों की भी खुलकर अनदेखी सामने आई है। जिस सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट की बात हो रही है, उसका निर्माण वन भूमि पर किया गया था, जिसके लिए स्मार्ट सिटी ने वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत अनुमति ली थी। लेकिन जिस जमीन पर सड़क बनाई गई, उसके लिए लोक निर्माण विभाग ने वन संरक्षण अधिनियम के तहत केंद्र सरकार से मंजूरी मांगी थी, जो अब तक नहीं मिली है।
सबसे गंभीर बात यही है कि बिना केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के ही सड़क पर डामर बिछा दिया गया। यानी साफ तौर पर नियमों को ताक पर रखकर काम किया गया। इससे वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका और गहरी हो जाती है।
इसके अलावा, एक और दिलचस्प पहलू ये है कि सोलर प्रोजेक्ट के साथ लगती जमीन को अचानक निजी संपत्ति घोषित कर दिया गया। यही नहीं, स्मार्ट सिटी द्वारा लगाई गई फेंसिंग को भी निर्माण करवा रहे व्यक्ति ने हटाकर दूसरी जगह लगा दिया। इस पूरे घटनाक्रम पर संबंधित अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं, जिससे मामला और संदिग्ध हो जाता है।
जब नगर निगम के SDO से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है और वे जांच के बाद ही कुछ कह पाएंगे। वहीं नगर निगम के टाउन प्लानर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए वार्ड नंबर 14 में चल रहे निर्माण कार्य की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने संबंधित जूनियर इंजीनियर को मौके पर जाकर पूरी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
मामले को और पेचीदा बनाता है जमीन का विवाद। बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर ये सब हो रहा है, वह मुश्तरका (साझा) जमीन है और इस पर पहले से ही कोर्ट में मामला चल रहा है। इतना ही नहीं, अन्य जमीन मालिकों की याचिका पर इस पर स्टे भी लगा हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि स्टे के बावजूद यहां निर्माण कार्य कैसे जारी है।