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April 20, 2026

हिमाचल: वैली फंक्शन में युवक-युवतियों ने किया भड़काऊ डांस, उतारे कपड़े; देव समाज हुआ नाराज

वैली फंक्शन में मंच के सामने युवक युवतिया के भड़काऊ डांस पर देव समाज ने जताया ऐतराज

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Kullu Dev samaj

कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को एक बार फिर कुछ युवक.युवतियों ने शर्मसार कर दिया। भगवान रघुनाथ की नगरी कुल्लू घाटी में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम की आड़ में आयोजित वैली फंक्शन में कुछ युवक युवतियों के अश्लील और भड़काऊ डांस से ना सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि पूरा देव समाज ही भड़क उठा है। बताया जा रहा है कि इस वैली फंक्शन में कुछ युवक.युवतियों ने शालीनता की सारी हदें पार कर दी। इन लोगों ने ना केवल भड़काऊ डांस किया, बल्कि सरेआम कपड़ों की मर्यादा को भी तार.तार कर दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में फूहड़ता का खुला प्रदर्शन

मिली जानकारी के अनुसार कुल्लू में दो दिन पूर्व आयोजित एक वैली फंक्शन अब विवादों के घेरे में आ गया है। इस कार्यक्रम के दौरान मंच के सामने कुछ युवक.युवतियों ने भद्दे और भड़काऊ अंदाज में डांस करना शुरू कर दिया।  स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुछ युवक कपड़े उतारकर अशोभनीय हरकतें करते नजर आए। यह पूरा घटनाक्रम वहां मौजूद लोगों के मोबाइल कैमरों में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

 

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हैरानी इस बात की है कि जिस देवभूमि में मर्यादा का पाठ पढ़ाया जाता है, वहां सैकड़ों की भीड़ में मौजूद लोग इस शर्मनाक हरकत को रोकने के बजाय अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने में मशगूल रहे।

यह हमारी संस्कृति नहीं, विरासत का अपमान 

इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए देव संस्कृति शोध संस्था के अध्यक्ष जय ठाकुर ने कहा कि यह महज एक डांस नहीं, बल्कि हमारी जड़ों पर प्रहार है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि 
भले ही यह किसी कॉलेज का निजी वैली फंक्शन हो, लेकिन सार्वजनिक स्थल पर इस तरह का नग्न प्रदर्शन और अश्लीलता कतई स्वीकार्य नहीं है। कुल्लू की संस्कृति हमारे आचरण और संस्कारों में बसती है। व्यावसायिक लाभ के लिए वैली फंक्शन्स की आड़ में युवाओं को गुमराह करना और फूहड़ता परोसना हमारी समृद्ध विरासत का घोर अपमान है।

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देव समाज में गहरा आक्रोश

देव समाज से जुड़े लोगों ने भी इस घटना पर कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि कुल्लू की पहचान पारंपरिक नृत्य और धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी रही है, लेकिन इस तरह के आयोजनों में फूहड़ता का प्रदर्शन न केवल अनुचित है, बल्कि पूरी संस्कृति का अपमान है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और युवा पीढ़ी को भटकाने का काम करती हैं।

 

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आयोजकों और व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद कार्यक्रम के आयोजकों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इस तरह के बड़े आयोजन किए जाते हैं, तो वहां शालीनता और अनुशासन बनाए रखना आयोजकों की जिम्मेदारी होती है। लेकिन इस कार्यक्रम में ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया, जिससे यह साफ है कि नियंत्रण और निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती गई।

वैली फंक्शन के नाम पर गुमराह हो रहे युवा

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि वैली फंक्शन के नाम पर युवाओं को गलत दिशा में ले जाया जा रहा है। उनका मानना है कि व्यावसायिक लाभ के लिए इस तरह के कार्यक्रमों में सांस्कृतिक मूल्यों की अनदेखी की जा रही है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।

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संस्कृति के संरक्षण की उठी मांग

घटना के बाद लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे आयोजनों पर सख्ती से निगरानी रखी जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि हिमाचल की पहचान उसकी संस्कृति और परंपराओं से हैए जिसे किसी भी कीमत पर खराब नहीं होने दिया जाना चाहिए।

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