शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के बाजारों में इन दिनों एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यह ट्रेंड रिफाइंड तेल, देसी घी और बिस्किट जैसे रोजमर्रा के उत्पादों की पैकिंग से जुड़ा है।
बाजारों में चला नया ट्रेंड
कंपनियों ने सीधे तौर पर कीमतें बढ़ाने की बजाय वजन कम करके नए पैक बाजार में उतार दिए हैं। नतीजा यह है कि ग्राहक रेट देखकर खुश हो जाते हैं, लेकिन असल में उन्हें कम मात्रा मिल रही होती है।
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नई पैकिंग का खेल
- रिफाइंड तेल 910ml से 600ml तक
पहले जहां बाजार में 910ml का रिफाइंड तेल ही सामान्य पैक माना जाता था। वहीं, अब-
- 600ml और 700–750ml की नई पैकिंग तेजी से बिक रही है।
- 600ml पैक 115 से 120 रुपये में मिल रहा है।
- 700–750ml पैक 130 से 140 रुपये तक बिक रहा है।
- 910ml पैक अब 160 से 170 रुपये में उपलब्ध है।
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फर्क समझना बेहद मुश्किल
कई ग्राहक 120 रुपये का पैक देखकर समझते हैं कि यह पहले जैसा ही है, जबकि असल में वह 910ml नहीं बल्कि 600ml का पैक होता है। पैकिंग का डिजाइन भी लगभग मिलता-जुलता होने से बिना ध्यान दिए फर्क समझना मुश्किल है।
उलझन में कई दुकानदार
अनाज मंडी से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक अक्सर यह कहकर बहस करने लगते हैं कि दूसरी दुकान पर वही तेल 20-30 रुपये सस्ता मिल रहा है। जबकि, हकीकत में दोनों पैक का वजन अलग होता है।
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अलग-अलग पैकिंग से हो रही गड़बड़
शिमला व्यापार मंडल से जुड़े कारोबारी बताते हैं कि अलग-अलग पैकिंग के कारण स्टॉक और बिक्री का हिसाब रखना भी चुनौती बन गया है। एक ही ब्रांड के तीन-तीन साइज आने से रैक मैनेजमेंट और बिलिंग में भी भ्रम की स्थिति बनती है।
बिस्किट-रस्क में भी यही रणनीति
केवल तेल या घी ही नहीं, बल्कि बिस्किट, रस्क और क्रीम जैसे उत्पादों में भी यही तरीका अपनाया जा रहा है। 10 रुपये के पैक का दाम भले नहीं बदला हो, लेकिन पहले जहां एक पैकेट में आठ बिस्किट आते थे, अब उनकी संख्या घटकर पांच रह गई है। पैकेट का आकार लगभग वैसा ही होने से आम ग्राहक तुरंत अंतर नहीं समझ पाता।
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- देसी घी: 1 किलो से 800 ग्राम
घी कंपनियों ने भी कीमत बढ़ाने के बजाय छोटे पैक उतारे हैं। कई ग्राहक 800 ग्राम पैक को एक किलो समझकर खरीद लेते हैं, क्योंकि पैकिंग का डिजाइन लगभग एक जैसा होता है। दरअसल-
- 800 ग्राम देसी घी 400 से 450 रुपये तक बिक रहा है।
- 1 किलो पैक 530 से 650 रुपये के बीच है।
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क्यों हो रहा है ऐसा?
खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब “स्टैंडर्ड पैकिंग” की अनिवार्यता पहले जैसी नहीं रही। कंपनियां प्रति यूनिट मूल्य के आधार पर अलग-अलग साइज बाजार में ला सकती हैं।
यही वजह है कि अब 600ml, 750ml या 800 ग्राम जैसे असामान्य साइज आम हो गए हैं।हालां कि सरकारी राशन डिपो में अभी भी एक किलो जैसी पारंपरिक स्टैंडर्ड पैकिंग में ही सामान दिया जा रहा है।
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ग्राहकों के लिए क्या है सलाह?
- पैक खरीदने से पहले वजन (ml/ग्राम) जरूर पढ़ें।
- केवल कीमत देखकर तुलना न करें, बल्कि “प्रति 100 ग्राम/ml” का हिसाब लगाएं।
- शक होने पर दुकानदार से बिल अवश्य लें।
- बच्चों के उत्पादों में संख्या और वजन दोनों जांचें।
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बाजार में बढ़ती “छिपी महंगाई”
विशेषज्ञ इसे “छिपी हुई महंगाई” मानते हैं जहां दाम वही रहते हैं, लेकिन मात्रा कम हो जाती है। इससे कंपनियां सीधे दाम बढ़ाने से बच जाती हैं, जबकि ग्राहक अनजाने में अधिक कीमत चुका देता है।
शिमला के बाजारों में यह बदलाव तेजी से फैल रहा है। ऐसे में जरूरी है कि ग्राहक जागरूक रहें और हर खरीदारी से पहले पैकिंग पर लिखी मात्रा को ध्यान से पढ़ें, ताकि सस्ते के चक्कर में महंगा सौदा न हो जाए।
