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February 27, 2026
सुक्खू सरकार को हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार, कहा- तबादलों के नाम पर 'मनमानी' नहीं चलेगी!
सुक्खू सरकार द्वारा सात माह में किए अधिकारी के तबादले को किया रद्द
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक बार फिर हिमाचल हाईकोर्ट के निशाने पर आ गई है। हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार को मनमाने तबादलों पर ना सिर्फ फटकार लगाई है, बल्कि अपनी शक्तियों का दुरुपयोग ना करने की चेतावनी भी दे डाली है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपने चहेतों को एडजस्ट करने के लिए किसी अधिकारी का समय से पहले तबादला करना गलत है।
दरअसल हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी तबादलों में कथित मनमानी पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल निष्पक्षता के साथ करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष अधिकारी को लाभ पहुंचाने या पसंदीदा कर्मचारी को मनचाही जगह तैनात करने के उद्देश्य से किया गया तबादला पूरी तरह असंवैधानिक है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की पीठ ने सरकार को आइना दिखाते हुए कहा कि शक्तियों का ऐसा दुरुपयोग न केवल नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि सीधे तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
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मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने ननखड़ी में तैनात बागवानी विषय विशेषज्ञ (SMS) के तबादला आदेश को कूड़ेदान में डालते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि रोहड़ू में अपना तीन साल का सफल कार्यकाल पूरा करने के बाद उसे ननखड़ी भेजा गया थाए लेकिन अभी सात महीने भी नहीं बीते थे कि उसे फिर से डोडरा क्वार के लिए रवाना कर दिया गया।
सरकार ने अपनी सफाई में इसे जनहित और प्रशासनिक आवश्यकता बताया, जिसे हाईकोर्ट ने पूरी तरह तर्कहीन करार दिया। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि फाइल में ऐसे किसी ठोस कारण का जिक्र तक नहीं हैए जो महज सात महीनों के भीतर एक क्लास-1 अधिकारी को हटाने की मजबूरी बयां कर सके।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक अहम तथ्य पर भी ध्यान दिया। जिन अधिकारियों को नई तैनाती दी जा रही थी, उनका तबादला बिना यात्रा भत्ता के किया गया था। कोर्ट ने इसे इस बात का संकेत माना कि तबादले विभागीय जरूरत से अधिक व्यक्तिगत अनुरोधों के आधार पर किए गए। न्यायालय ने टिप्पणी की कि समानता के सिद्धांत और मनमानी प्रशासनिक कार्रवाई साथ-साथ नहीं चल सकतीं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य की हर प्रशासनिक कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अनुरूप होनी चाहिएए जो समान अवसर और निष्पक्षता की गारंटी देते हैं। अदालत ने दो टूक कहा कि किसी अधिकारी को हटाकर दूसरे को लाभ देना शासन की विश्वसनीयता को कमजोर करता है और यह कानून की नजर में स्वीकार्य नहीं है।
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हाईकोर्ट ने तबादला आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी को उचित अवधि तक वर्तमान स्थान पर कार्य करने दिया जाए। साथ ही अदालत ने सुक्खू सरकार को चेतावनी दी कि भविष्य में प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग केवल वैध, पारदर्शी और न्यायसंगत आधार पर ही किया जाए, अन्यथा ऐसे फैसले न्यायिक समीक्षा से बच नहीं पाएंगे।