हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अवैध खनन के जिन्न ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। हमीरपुर से भाजपा विधायक आशीष शर्मा के परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। वीरवार को हमीरपुर की सीजेएम कोर्ट ने अवैध खनन और रिकॉर्ड में धोखाधड़ी के मामले में विधायक के भाई प्रवीण कुमार और चाचा उमेश कुमार को कोई राहत न देते हुए दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब इस मामले ने पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया है।

कोर्ट से नहीं मिली राहत, दो दिन का रिमांड

सीजेएम कोर्ट हमीरपुर में पेशी के दौरान आरोपी उमेश कुमार और प्रवीण कुमार को राहत नहीं मिली। अदालत ने पुलिस की मांग स्वीकार करते हुए दोनों को दो दिन के रिमांड पर भेज दिया। अब सुजानपुर थाना में उनसे गहन पूछताछ की जाएगी। बता दें कि दोनों आरोपियों ने बीते रोज ही अदालत में आत्मसमर्पण किया था। उन्हें एक दिन के रिमांड पर लिया गया था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद पुलिस ने दोबारा अदालत से समय मांगा, ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके।

 

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सुजानपुर थाने में होगी पूछताछ, सुरक्षा कड़ी

कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर हमीरपुर से सुजानपुर थाना शिफ्ट कर दिया है। रिमांड के दौरान पुलिस अवैध खनन से जुड़े दस्तावेजों] वित्तीय लेन-देन और क्रशर यूनिट के रिकॉर्ड्स को लेकर कड़ी पूछताछ करेगी।

सुप्रीम कोर्ट तक नहीं मिली थी राहत

यह मामला महावीर स्टोन क्रशर पर हुई छापेमारी से जुड़ा है। पुलिस ने एफआईआर नंबर 53/25 के तहत आरोप लगाया है कि स्टोन क्रशर के संचालन में बड़े पैमाने पर अवैध खनन और कागजी गड़बड़ी की गई है। इस मामले में आरोपियों की जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हो चुकी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

 

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छापेमारी और डिजिटल साक्ष्य

बीते वर्ष हमीरपुर पुलिस ने एसपी के नेतृत्व में विधायक से जुड़े इस क्रशर यूनिट पर बड़ी छापेमारी की थी। जांच टीम का दावा है कि वहां से जब्त की गई सीसीटीवी फुटेज, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड्स इस अवैध कारोबार की गवाही दे रहे हैं। पुलिस अब रिमांड के दौरान इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कड़ियों को जोड़ने की कोशिश करेगी।

बदले की भावना या कानून का राज?

विधायक आशीष शर्मा के परिजनों पर हुई इस कार्रवाई ने हिमाचल विधानसभा से लेकर सड़कों तक सियासत गरमा दी है। भाजपा ने इसे कांग्रेस सरकार की बदले की राजनीति करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि आशीष शर्मा ने चूंकि निर्दलीय से भाजपा का दामन थाम लिया और राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी का समर्थन किया, इसलिए सरकार उन्हें और उनके परिवार को निशाना बना रही है। वहीं भाजपा विधायक आशीष शर्मा पहले भी विधानसभा में इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उनका कहना है कि सरकार सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है और उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है।

 

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राज्यसभा चुनाव से जुड़ी है टीस?

राजनीतिक पंडित इस पूरी कार्रवाई को फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। आशीष शर्मा उन विधायकों में शामिल थे जिन्होंने बगावत की थी और बाद में भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। तब से लेकर अब तक, विधायक शर्मा और सुक्खू सरकार के बीच की तल्खी किसी से छिपी नहीं है।

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