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April 16, 2026
हिमाचल: 3 दागी प्रोफसरों पर गिरी गाज, कॉलेज छात्राओं से नीचता करने पर नौकरी से किए बर्खास्त
सुक्खू सरकार ने तीन प्रोफेसरों को नौकरी से किया बर्खास्त
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने शिक्षा के मंदिरों में गुरु.शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों में घिरे तीन सहायक प्रोफेसरों को सुक्खू सरकार ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।
शिक्षा सचिव राकेश कंवर द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि इन प्रोफेसरों के कृत्य ने न केवल शिक्षक की गरिमा को गिराया, बल्कि पवित्र गुरु-शिष्य परंपरा को भी कलंकित किया है। यह कार्रवाई न केवल दोषियों के खिलाफ सख्त संदेश है, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को भी दर्शाती है।
विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद जिन तीन प्रोफेसरों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उनके नाम और तैनाती इस प्रकार है:-
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शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेशों के तहत तीन अलग.अलग कॉलेजों में तैनात सहायक प्रोफेसरों पवन कुमार, अनिल कुमार और वीरेंद्र शर्मा को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। विभागीय जांच में तीनों के खिलाफ छात्राओं से यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोप सही पाए गए।
शिमला के फाइन आर्ट कॉलेज में तैनात पवन कुमार पर एक छात्रा ने गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के मुताबिक वह लंबे समय से छात्रा को मानसिक रूप से परेशान कर रहा था और उसे अपने घर बुलाकर गलत हरकत करने की कोशिश की। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए छात्राओं को बिना अनुमति कार्यक्रमों में ले जाता था।
नादौन कॉलेज में रसायन विज्ञान के सहायक प्रोफेसर अनिल कुमार पर बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा ने प्रैक्टिकल के दौरान लैब में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। 14 नवंबर 2024 को दर्ज शिकायत की जांच के बाद आरोपों को सही पाया गया, जिसके बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से हटा दिया।
तीसरा मामला सबसे संगीन है, जिसमें गणित के प्रोफेसर वीरेंद्र शर्मा ने बीएससी सेकंड ईयर की छात्रा को व्हाट्सएप के जरिए जाल में फंसाया। आरोपी छात्रा को अपनी कार में बैठाकर जबरन अपने घर ले गया और वहां शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। छात्रा की बहादुरी और शिकायत के बाद हुई गहन जांच में प्रोफेसर को दोषी पाया गया, जिसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया। वीरेंद्र शर्मा चंबा जिला में राजकीय महाविद्यालय तीसा में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात था।
शिक्षा सचिव राकेश कंवर द्वारा जारी आदेशों में साफ कहा गया है कि ऐसे कृत्य न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि शिक्षक की गरिमा और जिम्मेदारी के भी खिलाफ हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा संस्थानों में इस तरह की हरकतों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकारी आदेशों के मुताबिक यह बर्खास्तगी केवल नौकरी से निकालना भर नहीं है। नियमों के तहत की गई इस कार्रवाई के बाद ये तीनों दोषी अब भविष्य में सरकार के तहत किसी भी नौकरी के लिए पात्र नहीं होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी की ऐसी संलिप्तता पाई जाती है, तो बिना किसी देरी के स्ट्राइक रेट के साथ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की इस कार्रवाई को छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा संस्थानों में विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी किसी शिक्षक या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आने पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।