चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक बड़ी सामाजिक बुराई पर समय रहते रोक लगा दी गई। चाइल्डलाइन चंबा की टीम ने पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से एक चुराह उपमंडल में 16 वर्ष 11 महीने की नाबालिग लड़की की शादी रुकवा दी।
हिमाचल पुलिस ने रुकवाया बाल विवाह
यह कार्रवाई उस समय की गई जब विवाह की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं और बारात चंबा शहर के समीपवर्ती क्षेत्र से निकलने वाली थी। दरअसल, कल सुबह चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर पर किसी जागरूक व्यक्ति ने गुप्त सूचना दी कि चुराह क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की की जबरन शादी करवाई जा रही है।
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पुलिस तक कैसे पहुंचा मामला?
सूचना में यह भी बताया गया कि लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम है और परिवार सामाजिक दबाव के चलते जल्दबाजी में विवाह करवा रहा है। सूचना मिलते ही चाइल्डलाइन चंबा के समन्वयक कपिल शर्मा ने तुरंत मामला संज्ञान में लिया और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया।
16 साल की लड़की का ब्याह
इसके बाद तीसा की CDPO और संबंधित सर्किल की आंगनबाड़ी सुपरवाइजर को सूचित किया गया। पुलिस टीम को साथ लेकर अधिकारी मौके पर पहुंचे। जब टीम गांव पहुंची, तब शादी की तैयारियां चल रही थीं।
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लड़की के बयान किए दर्ज
परिजनों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में लड़की के दस्तावेजों की जांच की गई। जन्मतिथि के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि लड़की अभी बालिग नहीं हुई है। मौके पर ही लड़की के बयान दर्ज किए गए, जिसमें उसने अपनी उम्र की पुष्टि की।
अगर हो जाती शादी तो...
टीम ने परिजनों को स्पष्ट रूप से बताया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है। अगर यह शादी होती है तो दूल्हे, दोनों पक्षों के अभिभावकों और विवाह संपन्न कराने वाले पंडित के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके बाद विवाह की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोक दी गई।
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दूल्हा पक्ष को भी दी गई चेतावनी
आंगनबाड़ी सुपरवाइजर ने दूल्हा पक्ष को भी फोन पर सूचित किया कि लड़की नाबालिग है और कानून के तहत यह विवाह अमान्य होगा। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि वे बारात लेकर आते हैं तो उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाएगा। सूचना मिलते ही दूल्हा पक्ष ने भी कार्यक्रम स्थगित करने की सहमति दे दी।
परिजनों को किया गया पाबंद
कार्रवाई के दौरान परिजनों को लिखित रूप से पाबंद किया गया कि वे लड़की की शादी सिर्फ 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही करेंगे। अधिकारियों ने परिवार को बाल विवाह निषेध अधिनियम की धाराओं के बारे में जानकारी दी और समझाया कि कम उम्र में शादी से लड़की के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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लोगों को जागरुक करने की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बाल विवाह जैसी कुरीति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। हालांकि, समय पर मिली सूचना और प्रशासन की तत्परता से एक नाबालिग को बाल विवाह की बेदी पर चढ़ने से बचा लिया गया।
आम जनता से अपील
चाइल्डलाइन टीम ने आम जनता से अपील की है कि अगर कहीं भी बाल विवाह या बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की जानकारी मिले तो तुरंत हेल्पलाइन पर सूचित करें। एक फोन कॉल किसी बच्चे का भविष्य बचा सकता है। इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और बच्चों के अधिकारों से समझौता अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
