मंडी। हिमाचल प्रदेश सरकार के हालिया फैसले से एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सुखू सरकार ने धर्मपुर लोकनिर्माण मण्डल के तहत कार्यरत 22 मल्टी टास्क वर्करों को शराब की दुकानों पर तैनात करने के आदेश जारी किए हैं। इसमें उपमंडल टिहरा के 12 और मढ़ी के 10 मजदूर शामिल हैं। एक्सईन धर्मपुर ने आदेश में इन वर्करों को शराब बेचने के लिए तैनात करने का निर्देश दिया है और एसडीओ और जेई को इन्हें जल्द से जल्द रिलीव करने का भी आदेश दिया है।

 

सीटू का कड़ा विरोध

 

इस फैसले का मजदूर यूनियन सीटू ने कड़ा विरोध किया है। सीटू के जिला प्रधान और पूर्व जिला पार्षद भुपेन्द्र सिंह ने कहा कि यह सरकार के गलत फैसलों का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 260 शराब की दुकानों की नीलामी इस साल नहीं हो पाई, जिससे सरकार को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की हठधर्मिता के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।

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पीडब्ल्यूडी के वर्करों की तैनाती पर सवाल

 

सीटू ने यह भी सवाल उठाया कि पीडब्ल्यूडी विभाग के वर्करों को सड़क निर्माण के लिए भर्ती किया गया था, लेकिन अब उन्हें शराब बेचने के लिए तैनात किया जा रहा है, जो कि सेवा शर्तों के खिलाफ है। इन्हें धर्मपुर मण्डल से बाहर भेजने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

 

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फैसले को रद्द करने की मांग

 

भुपेन्द्र सिंह ने सरकार और विभाग से इस फैसले को तुरंत रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि विभाग का कार्य समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक होता है, लेकिन शराब की दुकानों का संचालन 12 घंटे से भी ज्यादा समय तक होता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या यह निर्णय स्थानीय विधायक की सहमति से लिया गया है या नहीं। सीटू ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।

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