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April 10, 2026

हिमाचल: भूस्खलन में 20 लोगों की मौ*त के बाद 5 करोड़ से बनाई सुरक्षा दीवार, एक साल में ही ढही

सुरक्षा दीवार गिरने से भ्रष्टाचार और निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

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shimla Landslide

शिमला। हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार किस हद तक अपनी जड़ें जमा चुका है, इसकी एक ताजा तस्वीर राजधानी शिमला के समरहिल क्षेत्र में देखने को मिली है। यहां शिव बावड़ी भूस्खलन के बाद सुरक्षा के नाम पर करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई दीवार एक साल भी नहीं टिक पाई और भर भराकर ढह गई। इस घटना ने न सिर्फ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की आशंका को भी बल दिया है।

दिसंबर में पूरा हुआ था काम

शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे यह दीवार अचानक गिर गई। हैरानी की बात यह है कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा इसका निर्माण पिछले दिसंबर में ही पूरा किया गया था। इतने कम समय में दीवार का ढह जाना कई गंभीर सवाल छोड़ गया है, क्या निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ? क्या तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई?या फिर इसमें कहीं न कहीं भ्रष्टाचार हुआ?

 

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निजी बस के गुजरते ही गिरी दीवार

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से दीवार में दरारें साफ दिखाई दे रही थीं और वहां से लगातार पत्थर व मलबा गिर रहा था। गुरुवार को भी एक निजी बस के वहां से गुजरने के दौरान मलबा गिरने की घटना सामने आई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

पैदल गुजरते हैं सैंकड़ों छात्र और कर्मचारी

यह मार्ग हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय जाने वाले हजारों छात्रों और कर्मचारियों के लिए मुख्य रास्ता है। इन दिनों विश्वविद्यालय में यूजी परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र इसी रास्ते से गुजर रहे हैं। दीवार गिरने के बाद अब उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है और वे जोखिम के साये में सफर करने को मजबूर हैं।

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निर्माण गुणवत्ता में हुआ है भ्रष्टाचार

समरहिल वार्ड के पूर्व पार्षद राजीव ठाकुर ने इस पूरे मामले को लेकर निर्माण कार्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दीवार का निर्माण जल्दबाजी में किया गया और गुणवत्ता से समझौता किया गया। उन्होंने इस मामले की विजिलेंस जांच कराने की मांग उठाई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।

शिव बावड़ी पर हुए भूस्खलन में 20 की हुई थी मौत

गौरतलब है कि 14 अगस्त 2023 को इसी स्थान पर हुए भीषण भूस्खलन में शिव बावड़ी मंदिर में 20 लोगों की जान चली गई थी। उस त्रासदी के बाद लोगों की सुरक्षा के लिए यह दीवार बनाई गई थी, लेकिन अब उसका इस तरह ढह जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है।

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फिलहाल प्रशासन ने मौके का निरीक्षण करने की बात कही है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह मार्ग खतरे से बाहर नहीं आ पाएगा। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि यदि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता का ध्यान न रखा जाए, तो वे खुद ही खतरा बन सकते हैं।

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