#अव्यवस्था
April 3, 2026
हिमाचल में गहराया LPG सिलेंडर संकट : रेट ने तोड़ी कमर, बंद होने की कगार पर ढाबे-होटल
2300 रुपये पार पहुंचे सिलेंडर के दाम
शेयर करें:

मंडी। हिमाचल प्रदेश में गैस सिलेंडर संकट गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई जगहों पर ढाबे व होटल बंद होने की कगार पर हैं। पहले से गैस की किल्लत से जूझ रहे इन कारोबारियों के लिए अब महंगी गैस ने हालात और भी कठिन बना दिए हैं।
मंडी शहर में कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दामों में हालिया बढ़ोतरी ने छोटे-बड़े होटल, ढाबा और रेस्तरां कारोबारियों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। कई संचालकों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो उन्हें अपना काम अस्थायी रूप से बंद करने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार, दो दिन पहले 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में करीब 200 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद अब एक सिलेंडर की कीमत लगभग 2300 रुपये तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब पहले ही कारोबारियों की आमदनी सीमित है और खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।
ढाबा संचालकों का कहना है कि कुछ महीने पहले तक यही सिलेंडर करीब 1700 रुपये में मिल जाता था। मगर धीरे-धीरे इसकी कीमत 2000 रुपये तक पहुंची और अब 2300 रुपये पार कर गई है। लगातार बढ़ती लागत के बावजूद ग्राहक पहले जैसी कीमत पर ही खाना चाहते हैं, जिससे व्यापारियों का मुनाफा लगभग खत्म होता जा रहा है।
मंडी के कई होटल मालिकों ने बताया कि गैस की नियमित आपूर्ति भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कई बार ऑर्डर देने के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाता, जिससे किचन का काम प्रभावित होता है।
कुछ जगहों पर तो हालात इतने खराब हो गए हैं कि गैस न मिलने पर संचालकों को तंदूर में लकड़ी जलाकर खाना बनाना पड़ रहा है। इसके अलावा कई लोग इलेक्ट्रिक इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं, लेकिन बिजली का खर्च भी कम नहीं है, जिससे कुल लागत और बढ़ जाती है।
कारोबारियों का कहना है कि वे महंगे दाम पर भी सिलेंडर खरीदने को तैयार हैं। मगर समय पर डिलीवरी न मिलना सबसे बड़ी परेशानी है। इससे ग्राहकों को भी इंतजार करना पड़ता है और कई बार उन्हें बिना खाना खाए ही लौटना पड़ता है।
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि कमर्शियल गैस की आपूर्ति को सुचारू किया जाए और कीमतों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो मंडी में छोटे होटल और ढाबों का कारोबार गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है- जिससे कई लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ेगा।