#अव्यवस्था
March 31, 2026
घाटे में डिप्टी CM का महकमा : 2300 करोड़ का नुकसान, खटारा HRTC बसों में धक्के खा रही जनता
पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में HRTC ही लोगों की जीवनरेखा है
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी बस सेवा की बदहाल तस्वीर एक वायरल वीडियो के जरिए पूरे देश के सामने आ गई है। इस वीडियो ना सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठा रहा है, बल्कि हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम की वर्तमान स्थिति को भी उजागर करता है।
वीडियो में साफ देखा जा रहा है कि तेज बारिश में HRTC बस की छत से पानी टपक रहा है और चालक छाता लेकर बस चलाने को मजबूर है। सरकारी बस की वीडियो वायरल होने के बाद सियासी पारा भी गरम हो गया है।
गौरतलब है कि प्रदेश के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में HRTC ही लोगों की जीवनरेखा है। मगर जब बसों की हालत ऐसी हो जाए कि अंदर बैठना भी मुश्किल हो, तो यात्रियों के सामने विकल्प सीमित हो जाते हैं। बारिश में टपकती छत, खराब सीटें और तकनीकी खामियां अब आम शिकायत बन चुकी हैं।
HRTC की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। 2023 में जहां निगम का घाटा करीब 1966 करोड़ रुपये था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 2119 करोड़ हो गया। अब यह आंकड़ा 2300 करोड़ से भी आगे निकल चुका है। हर साल घाटा बढ़ रहा है और आय के स्रोत सीमित होते जा रहे हैं।
निगम की हालत इस कदर कमजोर हो चुकी है कि उसे अपने रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी सरकार पर निर्भर रहना पड़ रहा है। राज्य सरकार हर महीने करीब 55 से 60 करोड़ रुपये की ग्रांट देती है, जो सालाना 650 से 700 करोड़ तक पहुंचती है। इसके बावजूद वित्तीय संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा।
निगम के करीब 10,800 से अधिक कर्मचारी हैं, लेकिन उन्हें समय पर वेतन मिलना अब दुर्लभ हो गया है। हर महीने पहली तारीख को वेतन मिलना तो दूर, कई बार देरी हफ्तों तक खिंच जाती है। पेंशनरों की स्थिति और भी चिंताजनक है- पिछले दो वर्षों में उन्हें कभी समय पर पेंशन नहीं मिली, और अक्सर 20 तारीख के बाद ही भुगतान हो पाता है।
HRTC को कई ऐसे रूट्स पर बसें चलानी पड़ती हैं, जहां यात्रियों की संख्या कम होती है, लेकिन सेवा बनाए रखना जरूरी होता है। इसके अलावा 28 अलग-अलग श्रेणियों को किराये में छूट दी जाती है। महिलाओं को 50 प्रतिशत किराया छूट भी निगम की आय पर असर डाल रही है। सामाजिक जिम्मेदारी निभाते-निभाते निगम आर्थिक रूप से कमजोर होता जा रहा है।
निगम के पास पहले करीब 3200 बसें थीं, लेकिन अब यह संख्या घटती जा रही है। वित्तीय संकट के कारण नई बसों की खरीद भी प्रभावित हो रही है। 297 ई-बसों की आपूर्ति पिछले छह महीनों से लंबित है, जिससे आधुनिकरण की योजना भी अटकी हुई है।
पिछले कुछ वर्षों में निगम की आय में गिरावट आई है, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है। स्थिति यह हो गई है कि कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के लिए भी सरकार की ग्रांट का इंतजार करना पड़ता है। यह निर्भरता भविष्य के लिए गंभीर संकेत दे रही है।
वायरल वीडियो ने केवल एक बस की खराब हालत नहीं दिखाई, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरी उजागर कर दी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एचआरटीसी को वित्तीय सुधार, बेहतर प्रबंधन और आधुनिक सुविधाओं के जरिए फिर से पटरी पर लाया जा सकता है, या फिर यह संकट और गहराता जाएगा।