शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम यानी HRTC में चालकों की कमी का संकट लगातार बना हुआ है। निगम में चालकों के 831 पद खाली होने के बावजूद जून में ड्राइविंग टेस्ट दे चुके हजारों युवाओं को अभी तक काम पर नहीं बुलाया गया है। इन युवाओं को अस्थायी तौर पर सेवाएं देने के लिए तैयार किए गए पैनल की अवधि भी छह महीने रखी गई थी, लेकिन पैनल बनने के बाद भी अब तक इसका इस्तेमाल नहीं हो पाया है।

33 डिपुओं में करीब 3100 युवाओं ने दिया था टेस्ट

दरअसल, इस स्थिति ने उन बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्होंने निगम की जरूरत को देखते हुए ड्राइविंग टेस्ट दिया था और काम मिलने की आस लगाए बैठे हैं। जून में HRTC में चालक-परिचालकों के आंदोलन और संभावित हड़ताल की स्थिति के बीच निगम प्रबंधन ने तत्काल व्यवस्था बनाए रखने के लिए अस्थायी चालकों का पैनल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी।

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इसी के तहत 23 जून को प्रदेश के 33 डिपुओं में ड्राइविंग टेस्ट आयोजित किया गया। करीब 3100 युवाओं ने इस टेस्ट में हिस्सा लिया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद छह महीने की वैधता वाला पैनल तैयार किया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर निगम इन युवाओं की सेवाएं ले सके। हालांकि, अब तक किसी भी अभ्यर्थी को पैनल से बुलाकर सेवा लेने की सूचना नहीं है।

छह महीने की वैधता, फिर भी नहीं मिली ड्यूटी

निगम की प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार इन चालकों को नियमित कर्मचारी के तौर पर नियुक्त नहीं किया जाना था। इन्हें जरूरत के आधार पर अस्थायी सेवाओं के लिए पैनल में रखा जाना था। प्रावधान के मुताबिक, ड्यूटी करने वाले चालक को प्रति दिन 1500 रुपये पारिश्रमिक दिया जाना था, जबकि आधे दिन की सेवा के लिए 750 रुपये देने की व्यवस्था थी।

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पैनल की वैधता छह महीने रखी गई थी और इस अवधि के दौरान आवश्यकता पड़ने पर निगम किसी भी चालक को बुलाकर सेवा ले सकता था। लेकिन पैनल तैयार होने के बावजूद अभी तक इसका इस्तेमाल नहीं होने से टेस्ट पास करने वाले युवा असमंजस में हैं। कई युवाओं ने उम्मीद की थी कि निगम में चालकों की भारी कमी को देखते हुए उन्हें जल्द काम मिलेगा।

831 पद खाली, फिर भी ड्राइवरों को इंतजार

HRTC में 831 चालक पदों का रिक्त होना इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है। एक तरफ निगम के पास बड़ी संख्या में स्वीकृत पद खाली हैं, वहीं दूसरी ओर ड्राइविंग टेस्ट में शामिल हो चुके युवाओं को अस्थायी काम भी नहीं मिल पाया है।

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चालकों की कमी का असर निगम की बस संचालन व्यवस्था और मौजूदा कर्मचारियों के कार्यभार पर भी पड़ रहा है। पर्याप्त संख्या में चालक उपलब्ध नहीं होने के कारण मौजूदा कर्मचारियों को ड्यूटी शेड्यूल, अवकाश और आराम के समय को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन का कहना है कि लंबे समय से खाली चल रहे पदों को नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाना चाहिए।

यूनियन ने स्थायी भर्ती की उठाई मांग

HRTC चालक यूनियन के अध्यक्ष मानसिंह ठाकुर ने कहा कि निगम में चालक पद काफी समय से रिक्त हैं। उन्होंने प्रबंधन के साथ हुई बैठक में इन पदों को जल्द भरने का मुद्दा उठाया। यूनियन की मांग है कि चालकों की भर्ती आरएंडपी नियमों के अनुसार नियमित तरीके से की जाए।

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यूनियन का तर्क है कि अस्थायी पैनल बनाकर युवाओं को लंबे समय तक इंतजार करवाना रोजगार की स्थायी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवाओं से ड्राइविंग टेस्ट लेने के बाद उन्हें काम नहीं देना उनके लिए निराशाजनक स्थिति है। यूनियन ने सरकार और निगम प्रबंधन से रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है।

प्रबंधन ने दिया आश्वासन

HRTC चालक-परिचालक संघ की निगम के प्रबंध निदेशक शिवम प्रताप सिंह के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर चर्चा हुई। बैठक में चालकों के खाली पदों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संघ के अनुसार, प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि चालकों के रिक्त पदों को भरने का मामला सरकार के समक्ष रखा जाएगा और पदों को जल्द भरने के प्रयास किए जाएंगे।

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