#अपराध
September 8, 2026
हिमाचल लैंड स्कैम : बैंक खाते में सिर्फ 17 रुपये, करोड़ों की जमीन का मालिक निकला नेकराम
बैंक बैलेंस और जमीन खरीद में बड़े अंतर पर विजिलेंस की नजर
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में सरकारी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच तेज हो गई है। ये जांच अब केवल राजस्व रिकॉर्ड, म्यूटेशन और रजिस्ट्रियों तक सीमित नहीं रह गई है।
मामले की जांच कर रही विजिलेंस ने अब जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े पैसों के स्रोत और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में प्रॉपर्टी डीलर नेक राम और उनके परिवार की घोषित आय, बैंक खातों में उपलब्ध रकम तथा वर्षों के दौरान खरीदी गई जमीनों के मूल्य के बीच बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है।
विजिलेंस की FIR और प्रारंभिक जांच में सबसे अहम सवाल यही उभरा है कि सीमित घोषित आय और कुछ खातों में बेहद कम बैलेंस होने के बावजूद लाखों-करोड़ों रुपये की जमीन खरीदने के लिए धन कहां से आया। जांच एजेंसी अब इसी वित्तीय अंतर की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और आने वाले समय में जमीन के प्रत्येक बड़े सौदे की मनी ट्रेल खंगालने की तैयारी की जा रही है।
विजिलेंस की ओर से दर्ज FIR के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में नेक राम ने अपने आयकर रिटर्न में कुल 12 लाख 03 हजार 790 रुपये की आय दर्शाई थी। इसी अवधि में नेक राम, उनकी पत्नी किरण बाला और मां मंगला देवी के नाम पर करीब 48.44 लाख रुपये मूल्य की जमीन खरीदे जाने का उल्लेख जांच में किया गया है।
विजिलेंस ने शुरुआती जांच में परिवार की घोषित आर्थिक स्थिति और जमीन खरीद के आंकड़ों की तुलना की। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों के बीच अंतर ऐसा है जिसकी विस्तृत वित्तीय जांच की आवश्यकता है। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि जमीन खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम का वास्तविक स्रोत क्या था।
हालांकि, यह जांच अभी जारी है और वित्तीय अंतर को लेकर विजिलेंस की ओर से की गई टिप्पणियां प्रथम दृष्टया जांच का हिस्सा हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।
वित्तीय जांच के दौरान नेक राम और उनके परिवार के बैंक खातों का रिकॉर्ड भी खंगाला गया। रिपोर्ट के मुताबिक-
जांच एजेंसी अब बैंक खातों में अलग-अलग समय पर मौजूद राशि, खातों में हुए लेन-देन और जमीन की खरीद के दौरान किए गए भुगतान का मिलान कर रही है।विजिलेंस जांच में पुराने जमीन सौदों को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 में नेक राम द्वारा करीब 48.50 लाख रुपये की जमीन खरीदे जाने और करीब 22.50 लाख रुपये की जमीन बेचे जाने का उल्लेख है।
इसके बाद वर्ष 2013 में भी जमीन के बड़े लेन-देन सामने आए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक उस वर्ष करीब 23.95 लाख रुपये मूल्य की जमीन खरीदी गई, जबकि करीब 11.80 लाख रुपये की जमीन बेचे जाने की जानकारी भी जांच में शामिल है।
इन आंकड़ों के आधार पर विजिलेंस अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि-
जांच में आयकर रिटर्न में दर्शाए गए कारोबार और जमीन से जुड़े लेन-देन का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया है। विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार, नेक राम का वर्ष 2011-12 में टर्नओवर करीब 2 लाख 07 हजार 955 रुपये था। इसके बाद वर्ष 2012-13 में टर्नओवर करीब 2 लाख 68 हजार 808 रुपये और वर्ष 2013-14 में 3 लाख 92 हजार 881 रुपये बताया गया है।
जांच एजेंसी के सामने सवाल है कि यदि घोषित कारोबार और आय सीमित थी तो लाखों रुपये मूल्य की जमीन खरीदने के लिए धन की व्यवस्था किस प्रकार की गई।
इसी वित्तीय अंतर के आधार पर विजिलेंस ने प्रथम दृष्टया यह आशंका जताई है कि जमीन खरीद में किसी अन्य व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की धनराशि का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। हालांकि जांच एजेंसी ने इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना है और इस दिशा में अभी विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
विजिलेंस की रिपोर्ट में वर्ष 2011 से 2025 के बीच नेक राम और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कई क्षेत्रों में जमीन खरीद-बिक्री का उल्लेख किया गया है।
इन क्षेत्रों में खनियारा, योल-2, मंदल, अंद्रार, जद्रांगल, सिद्धबाड़ी, धर्मशाला, शीला और पालमपुर समेत अन्य इलाके शामिल हैं। जांच में इन जमीनों की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेज और रजिस्ट्रियों का अध्ययन किया जा रहा है।
बताया गया है कि वर्षों के दौरान हुई इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री का बाजार मूल्य करोड़ों रुपये तक पहुंचता है। ऐसे में विजिलेंस अब प्रत्येक प्रमुख सौदे की अलग-अलग वित्तीय पड़ताल करने की तैयारी में है।
मामले में जांच का अगला चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जैसे कि-
इस पूरे मामले की शुरुआत रक्कड़-सिद्धबाड़ी क्षेत्र की सरकारी जमीन की म्यूटेशन से जुड़ी शिकायत से हुई थी। विजिलेंस एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2019 में नेक राम ने कुछ लोगों को संबंधित जमीन की म्यूटेशन उनके नाम करवाने का भरोसा दिया था।
FIR के अनुसार, इसके बदले प्रत्येक व्यक्ति से 15 लाख रुपये लेने की बात भी जांच में सामने आई है। आरोप है कि बाद में राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से जमीन की म्यूटेशन और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। इन्हीं आरोपों की जांच के दौरान अब मामला जमीन के रिकॉर्ड से निकलकर उससे जुड़े बड़े वित्तीय लेन-देन तक पहुंच गया है।
मामले में आठ लोगों को नामजद किया गया है। इनमें-
मामले की जांच विजिलेंस की इंस्पेक्टर बिंदु कुमारी कर रही हैं। जांच एजेंसी राजस्व रिकॉर्ड, म्यूटेशन, रजिस्ट्रियों, बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों को आपस में मिलाकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच में आने वाले समय में कई और दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और जमीन के पुराने सौदों की पड़ताल की जा सकती है।
इस पूरे मामले के केंद्र में आए प्रॉपर्टी डीलर नेक राम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वे वर्ष 2007 से प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार से जुड़े हुए हैं और उनके द्वारा किए गए सभी जमीन सौदे राजस्व नियमों के तहत हुए हैं।
नेक राम ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रताड़ना बताया है। उनका आरोप है कि पिछले करीब दो वर्षों से अलग-अलग एजेंसियां उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए बुला रही हैं, जिससे उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौजूदा स्थिति के कारण वे किसी पटवार सर्किल या तहसील कार्यालय में जाने से भी बचने लगे हैं। उनके अनुसार, उन्हें नई रजिस्ट्रियों से दूर रहने की सलाह तक दी जा रही है।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल जमीन के सौदों की वित्तीय व्यवस्था को लेकर बना हुआ है। विजिलेंस के सामने चुनौती यह पता लगाने की है कि वर्षों के दौरान खरीदी गई संपत्तियों के लिए वास्तविक धन कहां से आया और क्या घोषित आय के अलावा कोई दूसरा वित्तीय स्रोत इस्तेमाल किया गया।
सरकारी जमीन की कथित गड़बड़ी से शुरू हुई जांच अब एक बड़े वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल तक पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में बैंक खातों, आयकर रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेजों और भुगतान की पूरी मनी ट्रेल इस मामले की दिशा तय कर सकती है। हालांकि मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल विजिलेंस जहां दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर मामले की परतें खोलने में जुटी है, वहीं आरोपित नेक राम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ प्रताड़ना बताया है।