#अपराध
September 9, 2026
हिमाचल बैंक नौकरी में 'मुन्नाभाई' खेल- पेपर किसी और से दिलवाकर हासिल की नौकरी, अब फंसे
CBI तक पहुंचा केस, फर्जी कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज
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शिमला। हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में भर्ती परीक्षा में कथित धोखाधड़ी कर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। CBI ने इस मामले में बैंक के दो कर्मचारियों के खिलाफ CBI थाना शिमला में प्राथमिकी दर्ज की है।
आरोप है कि दोनों ने बैंक में ऑफिस असिस्टेंट (मल्टीपर्पस) के पद पर नियुक्ति पाने के लिए भर्ती परीक्षाओं में अपनी जगह दूसरे व्यक्तियों को बैठाया था। मामला उजागर होने के बाद बैंक कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
मामले में राजस्थान के रहने वाले रविंद्र मीणा और जितेंद्र कुमार मीणा को आरोपी बनाया गया है। FIR में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। CBI ने मामले को भर्ती प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े, पहचान बदलकर परीक्षा देने और उसके आधार पर सरकारी बैंक की नौकरी हासिल करने से जुड़ा माना है।
FIR दर्ज होने के समय रविंद्र मीणा हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक की बगस्याड़ शाखा, जिला मंडी में ऑफिस असिस्टेंट (मल्टीपर्पस) के पद पर तैनात था। वहीं, दूसरे आरोपी जितेंद्र कुमार मीणा की तैनाती पांगणा शाखा, जिला मंडी में थी।
CBI की जांच के मुताबिक दोनों की नियुक्तियां IBPS के माध्यम से आयोजित भर्ती परीक्षाओं के बाद हुई थीं। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब इन नियुक्तियों की प्रक्रिया और परीक्षा में इस्तेमाल की गई पहचान से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार रविंद्र मीणा पर आरोप है कि उसने IBPS-2023 भर्ती परीक्षा में खुद उपस्थित होने के बजाय अपनी जगह किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति को परीक्षा में बैठाया। कथित तौर पर इसी प्रक्रिया के जरिए वह ऑफिस असिस्टेंट पद के लिए चयनित हुआ।
चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद रविंद्र ने 12 फरवरी 2024 को हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में नौकरी ज्वाइन की। उस समय भर्ती प्रक्रिया के दौरान उसके नाम और पहचान से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हुई। हालांकि बाद में उसके बायोमीट्रिक रिकॉर्ड के दोबारा सत्यापन के दौरान मामला संदिग्ध हो गया।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य IBPS की ओर से कराए गए बायोमीट्रिक पुन: सत्यापन के दौरान सामने आया। CBI के अनुसार दोबारा सत्यापन में रविंद्र मीणा का बायोमीट्रिक रिकॉर्ड परीक्षा के अलग-अलग चरणों में दर्ज रिकॉर्ड से मेल नहीं खाया।
बताया गया है कि प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के दौरान उपलब्ध बायोमीट्रिक रिकॉर्ड की तुलना बाद में किए गए सत्यापन से की गई। इसमें कथित तौर पर समानता नहीं मिली।
इतना ही नहीं, भर्ती रिकॉर्ड में मौजूद फोटो और दस्तावेजों का मिलान भी रविंद्र मीणा की पहचान से जुड़े मौजूदा फोटो और दस्तावेजों से नहीं हो पाया। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में उसकी वास्तविक पहचान और परीक्षा में उसकी मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े हुए।
CBI ने दूसरे आरोपी जितेंद्र कुमार मीणा पर भी इसी तरह का आरोप लगाया है। FIR के अनुसार उसने **IBPS की 2022 भर्ती परीक्षा** में कथित तौर पर अपनी जगह एक अज्ञात प्रॉक्सी या इम्पोस्टर को परीक्षा में बैठाया।
परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जितेंद्र कुमार ने 1 जुलाई 2023 को हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में ऑफिस असिस्टेंट (मल्टीपर्पस) के पद पर नौकरी ज्वाइन की। CBI अब यह जांच कर रही है कि परीक्षा में कथित तौर पर उनकी जगह बैठने वाले लोग कौन थे और भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरोपियों की पहचान से संबंधित दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई थी।
CBI की FIR में दोनों आरोपियों पर कथित फर्जी चयन के आधार पर बैंक की नौकरी करने और उससे मिलने वाले वेतन तथा अन्य सेवा लाभ प्राप्त करने का भी आरोप लगाया गया है। जांच के मुताबिक रविंद्र मीणा 3 फरवरी 2026 तक बैंक की सेवा में रहा। इस अवधि में उसे वेतन और अन्य भत्तों के रूप में करीब 11.10 लाख रुपये मिलने की बात FIR में दर्ज है। इसके अलावा रविंद्र ने बैंक से करीब 3 लाख रुपये का ऋण भी लिया था। FIR के अनुसार इस ऋण में से लगभग 2.28 लाख रुपये बकाया बताए गए हैं।
दूसरे आरोपी जितेंद्र कुमार मीणा के संबंध में भी FIR में वेतन और सेवा लाभ का उल्लेख किया गया है। CBI के मुताबिक वह भी 3 फरवरी 2026 तक बैंक की सेवा में रहा। इस अवधि के दौरान उसे वेतन और अन्य भत्तों के तौर पर करीब 14.46 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई है।
इसके अलावा उसके नाम पर बैंक से लिए गए दो ऋणों का भी उल्लेख FIR में किया गया है। बताया गया है कि जितेंद्र के नाम पर 5 लाख रुपये और 3 लाख रुपये के दो ऋण थे। दोनों ऋणों को मिलाकर करीब 7.45 लाख रुपये बकाया रहने की जानकारी FIR में दर्ज है।
CBI की प्राथमिकी में मामले से जुड़े कुछ स्थानों और संस्थानों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें शिवा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, चांदपुर, बिलासपुर और LR इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ओच्छघाट, सोलन शामिल हैं।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि भर्ती परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और आरोपियों की पहचान से जुड़े घटनाक्रम में इन स्थानों की क्या भूमिका रही। मामले से जुड़े दस्तावेजों, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
मामले में CBI ने केवल दोनों बैंक कर्मचारियों को ही आरोपी नहीं बनाया है। FIR में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अज्ञात अन्य लोगों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी भर्ती प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े को केवल उम्मीदवारों तक सीमित मानकर नहीं चल रही है।
CBI यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि परीक्षा में किसी दूसरे व्यक्ति को बैठाने, पहचान संबंधी दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी और बाद में नौकरी हासिल करने की प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं।
हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज या प्रमाणपत्र इस्तेमाल किए जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। अलग-अलग विभागों में ऐसे मामलों की जांच पुलिस और विजिलेंस एजेंसियों ने की है।
शिमला, मंडी और कांगड़ा जिलों में डाक विभाग से जुड़े कुछ मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति के आरोप सामने आ चुके हैं। मंडी के गोहर क्षेत्र में एक युवक पर कथित फर्जी IRDP प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप लग चुका है। इसी तरह HPU में नियुक्त सहायक प्रोफेसर डॉ. विजय सिंह के खिलाफ भी कथित फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी लेने के आरोप में मामला दर्ज होने का उल्लेख किया गया है।
शिक्षा विभाग में वर्ष 2024 की बैचवाइज TGT मेडिकल भर्ती के दौरान भी कुछ अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को लेकर विजिलेंस के स्तर पर संदेह सामने आया था। आरोप था कि कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए मेरिट में स्थान हासिल करने की कोशिश की गई।
इसके अलावा सरकाघाट निवासी विवेक शर्मा पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर आयुर्वेद विभाग में सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगा था। इस मामले में विजिलेंस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया था। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड में भी एक जूनियर हेल्पर के खिलाफ गैर-मान्यता प्राप्त बोर्ड के प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने का मामला सामने आया था। जांच के बाद बिजली बोर्ड ने उसकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
ग्रामीण बैंक के इस मामले में अब CBI की जांच आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी दोनों आरोपियों की भर्ती से संबंधित मूल रिकॉर्ड, IBPS परीक्षा के बायोमीट्रिक डेटा, फोटो, दस्तावेज सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड और बैंक में नियुक्ति के बाद मिले वेतन एवं अन्य लाभों की जानकारी खंगाल सकती है।
जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना भी होगा कि कथित तौर पर परीक्षा में आरोपियों की जगह बैठने वाले व्यक्ति कौन थे और उनकी पहचान कैसे सुनिश्चित की गई। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि भर्ती प्रक्रिया के किसी चरण में लापरवाही या किसी व्यक्ति की मिलीभगत हुई थी या नहीं।
फिलहाल CBI ने दोनों कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस कथित भर्ती फर्जीवाड़े में आरोपियों के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे और भर्ती प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।